आज मनुष्य की सांसों पर जो संकट है,उसका कारण मनुष्य स्वयं ही है पृथ्वी का दोहन हमने इस तरह से किया है कि सांस लेने की भी जगह नहीं बची है : मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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महावीर जन्मोत्सव पर विशेष • भगवान महावीर के पांच सिद्धांतों के जरिए कोरोना महामारी पर विजय पा सकते हैं

डूंगरपुर। आज जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्माेत्सव है। साल 2020 के बाद यह दूसरा माैका है, जब महावीर जन्माेत्सव पर किसी तरह के धार्मिक आयाेजन जैसे जुलूस, शाेभायात्रा, मंदिराें में पूजा, पारणा झुलाने के कार्यक्रम नहीं हाे रहे हैं।
साल 2021 में पूरे देश में काेराेना महामारी का संकट है। इस बीच भगवान महावीर स्वामी के उपदेश व सिंद्धात काेराेना काल में सार्थक साबित हाे रहे हैं। डूंगरपुर जिले के भीलूड़ा गांव में विराजित जैन मुनि पूज्य सागर महाराज से दैनिक भास्कर संवाददाता ने महावीर जन्माेत्सव काे लेकर बातचीत की। इस दाैरान उन्हाेंने भगवान महावीर के सिद्धांत व उपदेश काे इस काेराेना काल में काफी काम का बताया। महाराज ने कहा कि आज मनुष्य जिन कोरोना महासंकट की समस्याओं से और जिन जटिल परिस्थितियों से घिरा हुआ है उन सबका समाधान महावीर के स्वास्थ्य-दर्शन और स्वस्थ जीवनशैली के सिद्धांतों में समाहित है। महाराज ने भगवान महावीर के सिद्धांत व उपदेश के जरिए के जरिए काेराेना जैसी महामारी पर विजय पा सकते हैं। कोरोना ने सबको क्वारंटाइन कर दिया है। क्वारंटाइन का अर्थ है अकेले में रहना। महावीर मानते हैं कि अकेलेपन में कोई होता ही नहीं है। कमरे में बंद हो जाने का मतलब अकेले रहना नहीं है। अकेलेपन में विषाद के लिए कोई जगह नहीं होती है। अकेलेपन में तो भीतर पाप की कुरुपता उभरकर बाहर आ जाती है। देखा जाए तो क्ववारंटाइन के दौरान मनुष्य का मन हर तरह की उधेड़बुन में लगा रहता है तो फिर अकेलापन कहां रहा। कोरोना काल ने साबित कर दिया है कि हमें स्वास्थ्य व देखभाल के ढांचे को फिर से पारिभाषित करना चाहिए ताकि भोजन को दवा के रूप में देखा जाए। यह एक ऐसी बीमारी है जो रोकी जा सकती है और उपचारयोग्य है। और यह मार्ग भगवान महावीर हमें बहुत पहले ही दिखा गए हैं।

अहिंसा: भगवान महावीर का पहला सिद्धांत है अहिंसा। अहिंसा के व्रत का पालन किए जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि काेराेना वायरस जैसी महामारी भी काफी हद तक प्रकृति के साथ की गई हिंसा का ही परिणाम है। आज मनुष्य की सांसों पर जो संकट आया है, उसका कारण मनुष्य स्वयं ही है। ऐसी परिस्थितियां हर काल में कम या अधिक बनती रही हैं। पृथ्वी का दोहन हमने इस तरह से किया है कि उसके लिए सांस लेने की भी जगह नहीं बची है। हमें अाॅक्सीजन देने वाले पेड़ाें काे काट दिया। देखा जाए ताे पेडाें की अंधाधुंध कटाई कर उनकी हिंसा करने काम किया है। वैज्ञानिक कह चुके है कि पेड़ाें में भी जीवन हाेता है। इसलिए पेड़ाें काे हिंसा से बचाना हमारी पहला दायित्व हाेना चाहिए। हर व्यक्ति यह संकल्प लें कि एक पेड़ वह जरूर लगाए उसकी ताउम्र देखभाल व रक्षा करें।

सत्य: भारत में कोरोना वायरस के फैलने का एक बहुत बड़ा कारण झूठ भी है क्योंकि कई लोगों ने काेराेना संक्रमित होने के बावजूद इस बात को सबसे छिपाकर रखा। भगवान महावीर से प्रेरणा लेते हुए आपको सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और अगर आपको या आपके परिवार में किसी के संक्रमित होने की आशंका है..तो इसकी जानकारी काे साझा करना चाहिए। हाे सकता है अापकी इम्यूनिटी अच्छी हाेगी ताे अापकाे कुछ नहीं हाेगा, लेकिन अापके झूठ छिपाने से परिवार के अन्य सदस्याें पर खतरा अा सकता है। इसलिए सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

अचाेर्य:भगवान महावीर के इस सिद्धांत का मतलब यह है कि आपको चोरी नहीं करनी है. लेकिन चोरी का अर्थ सिर्फ भौतिक वस्तुओं की चोरी नहीं है. बल्कि चोरी का अर्थ खराब नीयत भी है। काेराेना महामारी में देखा जा रहा है कि लाेगाें की जान बचाने के लिए जिस रेमिडिसीवर इंजेक्शन की जरूरत है, उसे बेचने के लिए खराब नीयत देखी जा रहा है। लगतार कार्यवाही कर इसे ब्लेक में बेचने वाले पकड़े जा रहे हैं। जिसकी इंजेक्शन की कींमत काफी कम है, उसे ब्लेक में हजाराें रुपए में बेचा जा रहा है। लाेगाें के जीवन बचाने के इस समय में खराब नियत लाेगाें की सामने अा रही है। इसलिए हमें अपनी नीयत में बदलाव लाना चाहिए।

ब्रह्मचर्य:  ब्रह्मचर्य का अर्थ आत्मा में लीन हो जाना. यानी अपने अंदर छिपे ब्रह्म को पहचानना। देखा जाए ताे बाहर की दुनिया आपको अशांत करती है इसलिए यदि अाप पाॅजिटिव हाे ताे आप बाहर दुनिया की परवाह छोड़कर सिर्फ अपने मन की शांति की दिशा में काम करेंगे तो आप ब्रह्मचारी कहलाएंगे. महावीर ने ये सिद्धांत आज से हज़ारों वर्ष पूर्व दिए थे लेकिन आज उनके सिद्धांतों का पालन करने की सबसे ज्यादा ज़रूरत है. क्योंकि ऐसी महामारियों को महावीर के विचार ही हरा सकते हैं। जाे व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है या घर पर हाेम अाइसाेलेट है, उसे काेराेना के डर से अपने मन काे अशांत नहीं करना है। अपने मन से डर काे दूर करना है ताकि काेराेना की इस बीमारी काे अापने मन से जीत लिया ताे अापकाे इस बीमारी पर विजय पा लेंगे।

अपरिग्रह: यानी आपको जितने की ज़रूरत है उतना ही संचय कीजिए। अभी इस बीमारी के दाैरान देखा जा रहा है कि जीवन रक्षक रेमिडिसीवर इंजेक्शन व अाॅक्सीजन सिलेंडर काे लेकर कई तरह की बात अा रही है। एेसे समय में हर व्यक्ति काे इस दिशा में साेचना चाहिए कि जिस व्यक्ति काे उसे अधिक जरूरत है, उसे पहले उपलब्ध कराए। कई लाेगाें ने इंजेक्शन का संग्रह कर रखा है, एेसे समय में संग्रह करने के बजाय जिसकाे इसकी जरूरत उसे इंजेक्शन उपलब्ध कराने में हर संभव मदद करनी चाहिए।

 

यह आलेख डूंगरपुर भास्कर में आज प्रकाशित हुआ है। वही से साभार है ।

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