आओ जानें महावीर को…– अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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भगवान महावीर को जन जन जानता है । महावीर एक ऐसे तीर्थंकर हैं जिन्हें जैनेतर समाज भी अच्छे से जानता है। कहने का अर्थ है महावीर के सिद्धांतों ने महावीर को एक अलग पहचान दिलाई है। तो आओ महावीर को और जानते हैं ।

भगवान महावीर एक….नजर में

अन्य नाम– वर्द्धमान, वीर, अतिवीर, महावीर, सन्मति

तीर्थकर क्रम – चौबीसवें (इसकाल के अंतिम तीर्थंकर)

जन्मस्थान -क्षत्रिय कुण्डग्राम, वैशाली

पिता नाम-सिद्धार्थ

माता नाम -त्रिशला देवी (प्रियकारिणी)

वंशनाम-नाथवंश

गर्भावतरण -आषाढ़ शुक्ल षष्ठी

जन्म तिथि -चैत्र शुक्ल त्रयोदशी,

वर्ण (कान्ति) -स्वर्णाभ

चिन्ह -सिंह

गृहस्थ काल-अविवाहित

कुमारकाल -28 वर्ष, 5 माह, 15 दिन

दीक्षा तिथि-मार्गशीर्ष कृष्ण 10, सोमवार, 26 सितम्बर, 566 ई.पू.

तप-12 वर्ष, 5 मास, 15 दिन

कैवल्य -वैशाख शुक्ल 10, रविवार, 26 अप्रैल, 557 ई.पू.

देशना पूर्व मौन -66 दिन

देशना-तिथि (प्रथम)-श्रावण कृष्ण प्रतिपदा, शनिवार, 1 जुलाई, 557 ई.पू.

निर्वाण तिथि -कार्तिक कृष्ण अमावस्या, मंगलवार, 15 अक्टूबर, 527 ई

निर्वाण भूमि-पावापुरी

आयु -72 वर्ष (71-4-25 )

जन्म समय  नक्षत्र : उत्तरा फाल्गुनी

ज्योतिर्ग्रह स्थिति राशि : कन्या

महादशा -बृहस्पति

दशा -शनि

अन्तर्दशा– बुध

ऊंचाई -7 हाथ

वैराग्य का कारण -जाति स्मरण

दीक्षा पालकी-चन्द्रप्रभा

दीक्षा वृक्ष-शाल

प्रथम आहार नगरी-कुलग्राम(कुंडलपुर)

प्रथम आहार दाना-राजाकूल

आहार किसका लिया -गौ क्षीर(दूध) से बने पकवान

छद्मस्तकाल -12 वर्ष

केवल ज्ञान का स्थान-ऋजुकलातीर(षगढ़ वन)

केवल ज्ञान का वृक्ष-शाल

समवशरण भूमि -योजन

मुख्य गणधर -इन्द्रभूमि

मुख्य श्रोता -श्रेणिक

केवली काल -30 वर्ष

मोक्ष आसन -खड़गासन

रुद्र -सात्यकि

यक्ष -गुह्नक

यक्षिणी-सिद्धायिनी

विशेष पद– बाल ब्रह्मचारी

प्रमुख उपदेश– जीओ और जीने दो , अहिंसा परमो धर्म:

गणधर: भगवान महावीर भगवान महावीर के 11 गणधर हैं।

इंद्रभूति (गौतम)/अग्निभूति/वायुभूति/व्यक्त/धर्मा/मण्डित/मौर्य पुत्र/अर्पित/अचल भ्राता/ मेनार्य/प्रभात

भगवान महावीर की पंचकल्याणक तिथियां

गर्भ कल्याणक – आषाढ़ शुक्ल 6

जन्मकल्याणक- चैत्र शुक्ल 13

तप कल्याणक- मगसिर कृष्ण 10

केवलज्ञान कल्याणक- वैशाख शुक्ल 10

मोक्ष कल्याणक- कार्तिक कृष्ण अमावस्या

महावीर के समवसरण में संयमी ,श्रावक श्राविका की संख्या

• केवली -700
• मनः पर्याय ज्ञान -700
• अवधिज्ञानी -1300
• चौदह पूर्वधारी-300
• वादी -400
• वैक्रिय लब्धि धारी-700
• अनुत्तरोपपातिक मुनि :-800

• साधु -14000
• साध्वियां-36000

• श्रावक- 100000

• श्राविकाएं -300000

पुरुरवा भील से लेकर भगवान महावीर के तक 34 भव

1. पुरुरवा भील
2. सौधर्म स्वर्ग में देव
3. भरत का पुत्र मरीचि
4. ब्रह्म स्वर्ग में देव
5. जटिल ब्राह्मण
6. सौधर्म स्वर्ग में देव
7. पुष्यमित्र ब्राह्मण
8. सौधर्म स्वर्ग में देव
9. अग्निसह नाम का ब्राह्मण
10. सनत्कुमार स्वर्ग में देव
11. अग्निमित्र ब्राह्मण
12. महेन्द्र स्वर्ग में देव
13. भारद्वाज
14. माहेन्द्र स्वर्ग में देव
15. त्रस/स्थावर के अनेक भव धारण किए
16. स्थावर नाम ब्राह्मण
17. माहेन्द्र स्वर्ग देव
18. विश्वनन्दी
19. महाशुक्र स्वर्ग में देव
20. त्रिपृष्ठ राजकुमार
21. सातवें नरक
22. सिंह
23. पहला नरक
24. सिंह ( यहां से उत्थान मुनियों द्वारा संबोधन)
25. सौधर्म स्वर्ग में हरिध्वज देव(सिंह केतु)
26. कनकोज्जवल
27. लान्तव स्वर्ग में देव
28. हरिषेण राजा
29. महाशुक्र स्वर्ग में देव
30. प्रियमित्र
31. सहस्त्रार स्वर्ग में देव
32. नंदन राजा
33. अच्युत स्वर्ग में देव
34. तीर्थंकर वर्धमान

इनके मध्य असंख्यातों वर्षों तक नरको में, त्रस—स्थावर योनियों में तथा इतर निगोद में जो भव ग्रहण किये हैं उनकी गिनती नहीं हो सकती है।

महावीर के पांच नाम

वीर: जन्माभिषेक के समय इन्द्र को शंका हुई कि बालक इतने जल प्रवाह को कैसे सहन करेगा। बालक ने अवधिज्ञान से जानकर पैर के अंगूठे से मेरु पर्वत को थोड़ा-सा दबाया, तब इन्द्र को ज्ञात हुआ इनके पास बहुत बल है। इन्द्र ने क्षमा माँगी एवं कहा कि ये तो वीर जिनेन्द्र हैं।
वर्धमान: राजा सिद्धार्थ ने कहा जब से बालक प्रियकारिणी के गर्भ में आया उसी दिन से घर, नगर और राज्य में धन-धान्य की समृद्धि प्रारम्भ हो गई, अतएव इस बालक का नाम वर्धमान रखा जाए।
सन्मति : एक समय संजय और विजय नाम के दो चारण ऋद्धिधारी मुनियों को तत्व सम्बन्धी कुछ जिज्ञासा थी। वर्द्धमान पर दृष्टि पड़ते ही उनकी जिज्ञासा का समाधान हो गया तब मुनियों ने वर्द्धमान का नाम सन्मति रखा।
महावीर: वर्द्धमान मित्रों के साथ एक वृक्ष पर क्रीड़ा (खेल) कर रहे थे, तब संगमदेव ने भयभीत करने के लिए एक विशाल सर्प का रूप धारण कर वृक्ष के तने से लिपट गया। सब मित्र डर गए, डाली से कूदे और भाग गए, किन्तु वर्द्धमान सर्प के ऊपर चढ़कर ही उससे क्रीड़ा करने लगे थे। ऐसा देख संगमदेव ने अपने रूप में आकर वर्द्धमान की प्रशंसा कर महावीर नाम दिया।
अतिवीर: एक हाथी मदोन्मत्त हो किसी के वश में नहीं हो रहा था। उत्पात मचा रहा था। महावीर को ज्ञात हुआ तो वे जाने लगे, तब लोगों ने मना किया किन्तु वे नहीं माने और चले गए। हाथी महावीर को देख नतमस्तक हो सूंड उठाकर नमस्कार करने लगा। तब जनसमूह ने कुमार की प्रशंसा की और उनका नाम अतिवीर रख दिया।

पांच सिद्धांत

1 .अहिंसा 2. सत्य 3.अस्तेय 4. ब्रह्मचर्य 5. अपरिग्रह

1• जीवों की स्थल हिंसा के त्याग को अहिंसा कहते हैं।

2• राग-द्वेष-युक्त स्थूल असत्य भाषण के त्याग को सत्य कहते हैं।

3• बुरे इरादे से स्थूल रूप से दूसरे की वस्तु अपहरण करने के त्याग को अस्तेय कहते हैं।

4• पर स्त्री का त्याग कर अपनी स्त्री में संतोष भाव रखने को ब्रह्मचर्य कहते हैं।

5• धन, धान्य आदि वस्तुओं में इच्छा का परिमाण रखते हुए परिग्रह के त्याग को अपरिहार्य कहते हैं।

 

भगवान महावीर का गर्भकल्याणक

जैन पुराणों के अनुसार आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन उत्तराषाढ़ नक्षत्र में कुंडलपुर नगर के राजा सिद्धार्थ की रानी त्रिशला को रात्रि के पिछले पहर में उन्होंने ऐरावत हाथी सुन्दर बैल, सिंह, हाथियों द्वारा स्वर्णकलश, से अभिषिक्त होती हुई लक्ष्मी, दो पुष्प माला, पूर्णचन्द उदित होता हुआ सूर्य, दो स्वर्ण कलश, क्रीड़ासक्त दो मछलियाँ, सुन्दर सरोवर, समुद्र, सिंहासन, स्वर्ग विमान, नागेन्द्र भवन, रत्नराशि और धूम रहित अग्नि के सोलह स्वप्न देखे। उन्होंने महाराज सिद्धार्थ को इन स्वप्नों की जानकारी दी तो सिद्धार्थ ने हर स्वप्न का अलग-अलग अर्थ बताते हुए कहा कि तीन लोक के नाथ तुम्हारे गर्भ में आ गए हैं।

भगवान महावीर का जन्माभिषेक महोत्सव

चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन माता त्रिशला ने पूर्व दिशा के सदृश अच्युतेन्द्र जीव को बालसूर्य रूप में जन्म दिया। सर्वत्र विश्व में आनन्द की एक लहर दौड़ गई। सौधर्म इन्द्र एक लाख योजन विस्तृत ऐरावत हाथी को सजाकर असंख्य देवों के साथ आये और नगरी की तीन प्रदक्षिणायें दीं। इन्द्र ने जिनबालक को ऐरावत हाथी पर विराजमान किया और सुमेरू पर्वत पर और क्षीरसागर के जल से भरे हुए 1008 कलशों से अभिषेक किया। इन्द्र ने उनके ‘वीर’ और ‘वर्धमान’ नाम रखे।

भगवान महावीर का दीक्षा महोत्सव

एक दिन भगवान को स्वयं ही आत्मज्ञान हो गया। उसी समय लौकांतिक देवों ने आकर भगवान् की स्तुति की। समस्त देवों ने आकर दीक्षा कल्याणक महोत्सव मनाया। भगवान् बंधुजनों से विदा लेकर ‘षण्ड’ नाम के वन में आए और दो दिन के उपवास का नियम लेकर विराजमान हो गए। मगसिर वदी दशमी के दिन भगवान् ने वस्त्र, आभरण, माला आदि उतार कर फेंक दिए और केशलोंच किया। भगवान् निग्र्रंथ दिगम्बर मुनि हो गए और मौन अवस्था में एकांत स्थानों, निर्जन वनों में तपस्या करने लगे।

भगवान् महावीर का केवलज्ञान महोत्सव

तपस्या करते हुए बारह वर्ष व्यतीत हो गए। वैशाख शुक्ला दशमी के दिन केवल ‘परमात्मा’ हो गए और पृथ्वी से पाँच हजार धनुष (बीस हजार हाथ) ऊपर आकाश में सुशोभित होने लगे। सौधर्म इन्द्र ने आकर देवों के साथ समवसरण की रचना की और केवलज्ञान महोत्सव मनाया। समवसरण में बैठे असंख्य भव्यजीव भगवान् की दिव्यध्वनि सुनने के लिए उत्सुक थे लेकिन गणधर नहीं होने के कारण उनकी दिव्य ध्वनि नहीं खिरी। इन्द्रन इन्द्रभूति नाम के ब्राह्मण के पास वृद्ध ब्राह्मण का रूप लेकर पहुंच गया और शास्त्रार्थ किया तो ब्राह्मण ने सोचा इसके गुरु के पास ही चलकर वाद-विवाद करना चाहिये। समवसरण में पहुँचकर मानस्तंभ देखते ही इन्द्रभूति का मानगलित हो गया। ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुए ये इन्द्रभूति गौतम मुनि बन गए और महावीर स्वामी के प्रथम गणधर हुए हैं। महाराज श्रेणिक भगवान् के समवसरण के मुख्य श्रोता थे।

भगवान महावीर का मोक्ष गमन

अन्त में भगवान् पावापुर नगर में पहुँचे। वहाँ के ‘मनोहर’ नाम के वन के भीतर अनेक सरोवरों के बीच में शिला पर विराजमान हो गये। वे दो दिन तक वहां विराजमान रहे और कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन रात्रि के अन्तिम समय स्वाति नक्षत्र में मोक्ष पर प्राप्त कर लिया। तभी से प्रतिवर्ष आदर पूर्वक प्रसिद्ध ‘दीप मालिका’ के द्वारा भगवान् महावीर की पूजा की जाती है।

महावीर प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1 – भगवान महावीर का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर – वैशाली (कुण्डरपुर)
प्रश्न 2- भगवान महावीर की आयु कितनी थी ?
उत्तर – 72 वर्ष
प्रश्न-3 भगवान महावीर के पांच नाम बताएं ?
उत्तर -महावीर,अतिवीर,सन्मति,वीर,वर्धमान
प्रश्न-4 भगवान महावीर का वंश का नाम बताओ?
उत्तर- इक्ष्वाकु
प्रश्न-5 भगवान महावीर के पिता का नाम बताएं ?
उत्तर- राजा सिद्धार्थ
प्रश्न-6 भगवान महावीर के माता का नाम बताएं ?
उत्तर- त्रिशला
प्रश्न-7 भगवान महावीर का जन्म तिथी बताओ?
उत्तर- चैत्र शुक्ल त्रयोदशी
प्रश्न-8 भगवान महावीर का मोक्ष कल्याणक तिथी बताओ?
उत्तर- कार्तिक अमावस्या
प्रश्न-9 भगवान महावीर मोक्ष स्थान बताओ ?
उत्तर-पावापुरी
प्रश्न-10 भगवान महावीर का वर्ण (रंग) बताओ ?
उत्तर- स्वर्ण
प्रश्न-11 भगवान महावीर की ऊंचाई बताओ ?
उत्तर- 6 फिट(7 हाथ)
प्रश्न-12 भगवान महावीर के यक्ष का नाम बताओ ?
उत्तर- मातंग
प्रश्न-13 भगवान महावीर यक्षणी का नाम बनाओ?
उत्तर- सिद्धायिका
प्रश्न-14 भगवान महावीर के प्रथम गणधर का नाम बताओ ?
उत्तर-गौतम गणधर
प्रश्न-15 भगवान महावीर के पांच सिद्धांत के नाम बताओ ?
उत्तर- अहिंसा,सत्य,अपरिग्रह,अचौर्य,ब्रह्मचर्य
प्रश्न-16 भगवान महावीर का चिन्ह क्या है ?
उत्तर-सिंह
प्रश्न-17 भगवान महावीर का साधना काल कितना है ?
उत्तर- 12 वर्ष
प्रश्न-18 भगवान महावीर के कितने गणधर थे ?
उत्तर- 11 गणधर
प्रश्न-19 भगवान महावीर का केवली काल कितना था ?
उत्तर- 30 वर्ष
प्रश्न-20 भगवान महावीर के समवशरण में कितने मुनि थे ?
उत्तर- 14000
प्रश्न-21 भगवान महावीर के समवसरण में कितनी आर्यिका एं थी ?
उत्तर-36000
प्रश्न-22 भगवान महावीर के समवसरण में कितने श्रावक थे ?
उत्तर-100000
प्रश्न-23 भगवान महावीर के समवसरण में कितनी श्राविकाएं थी ?
उत्तर- 300000
प्रश्न-24 भगवान महावीर की दिव्य देशना कितने दिन बाद खिरी?
उत्तर-66 दिन बाद
प्रश्न-25 भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण के कितने समय बाद भगवान महावीर का जन्म हुआ था ?
उत्तर-188 वर्ष

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