अंतर्मुखी के दिल की बात- 2

label_importantअंतर्मुखी के दिल की बात

सबसे पहले आप सभी को आशीर्वाद। आपको पता ही है कि दिवाली खुशियों वाली अभियान चल रहा है। इस अभियान को आप सभी का जो प्यार और संबल मिल रहा है, उसकी मुझे अपार खुशी है। कई लोगों ने दीपक दान किए हैं, कुछ ने दीपक खरीदने का संकल्प पत्र भरा है तो कुछ ने दीपक के पैकेट बनाकर अपनों को उपहारस्वरूप दिए हैं। वहीं कुछ संगठन अभियान से जुड़ने का आह्वान कर रहे हैं। 

इस अभियान को समाजसेवकों, संतों, पत्रकारों, संगठनों से भी सराहना मिल रही है। अभियान से मुझे खुशी भी है तो दुख भी। खुशी तो इस बात की है कि इस अभियान से अनेक लोग जुड़े और कुम्हारों को काम मिला, यह एक उद्देश्य तो पूरा हुआ। दूसरा उद्देश्य था कि लोग अपने देश के कुम्हारों द्वारा बने दीपक खरीदने के प्रति रुचि दिखाएं, वह भी हुआ। तीसरा उद्देश्य था कि बेरोजगार भी जुड़ें लेकिन इस कार्य में अभी तक कम ही सफलता मिली है  लेकिन विश्वास है कि आगे इस काम में पूर्ण सफलता मिलेगी। जो बेरोजगार जुड़े, वे रोज का पैसा दिन के हिसाब से चाहते हैं लेकिन स्वयं व्यापार करना नहीं चाहते हैं। यह उनके आत्मविश्वास की कमी के कारण हो रहा है। इसके लिए आप सभी को बेरोजगारों के भीतर यह विश्वास पैदा करना होगा कि नौकरी ढूंढने की बजाए वे स्वयं का व्यापार प्रारम्भ करें। यह विश्वास आपको पैदा करना है और उनका डर दूर करना है। यह आप ही कर सकते हैं। उनके अंदर विश्वास पैदा करने के लिए आपको अपनों के बीच हुनर वाले लोगों की बनी वस्तु को खरीदने आदत डालनी होगी और अगर किसी को उपहार देना हो तो भी वही उपहार देना होगा, जिससे उन वस्तुओं की मांग बढ़ेगी तो उनका उत्पादन भी अधिक होगा और फिर उन वस्तुओं को  घर-घर पहुंचाने के लिए व्यक्तिओं की आवश्यकता होगी तो बेरोजगारों का अपने स्वयं के व्यापार या उनके परिवार में चल रहे पारंपरिक व्यापार में भी रुझान बढ़ेगा। इससे परंपरागत व्यापार, जो समाज में बंद हो गया, वह भी शुरू होगा। आप सबसे अंतकरण से एक सहयोग चाहता हूं कि आप भी ऐसे बेरोजगारों के नाम और उनका संपर्क नम्बर हमें 9309201008 पर भेजें। उन बेरोजगारों को हमसे दिवाली खुशियों वाली अभियान के जरिये जोड़ें। हम उसे काम देंगे और व्यापार करने का हुनर सिखाएंगे, ताकि हमारा उद्देश्य पूर्ण होने से हमें सफलता मिल सके।

अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज 

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