अंतर्भाव

अंतर्भाव:- ‘भय की छाया में नए वर्ष में प्रवेश ना करें’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

  धर्मानुरागी बंधुओं…अंग्रेजी नव वर्ष 2021 आज से आरम्भ हो गया है। हमारे जीवन में जब कोई नई चीज आती…

अंतर्भाव:- ‘मूलाचार ग्रंथ की ये गाथाएं आपके भावों को बनाएंगी निर्मल’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

धर्मानुरागी बंधुओं….आज हम आचार्य वट्टकेर द्वारा रचित मूलाचार ग्रन्थ की कुछ गाथाओं के बारे में बात करेंगे। उन्होनें इन गाथाओं…

अनंत सागर अंतर्भाव:- ‘अपनी गलतियों और कमियों को स्वीकार करना सीखो’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

मैंने प्रमाद से बहुत दोष किए हैं…. मैं रागी हूं….मैं द्वेषी हूं….मैं दुष्ट हूं…..मैं अशब्द बोलने वाला हूं….मैं पापी हूं….मैं…

अंतर्भाव:- ‘हृदय में जिनेन्द्र भगवान हों तो कर्म मल शिथिल पड़ जाते हैं’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

हींग की डिब्बी में हलवा भर दिया जाए तो हलवे का स्वाद और खुशबू दोनों ही हींग जैसी हो जाएंगे।…

अंतर्भाव:- ‘शाश्वत सुख की प्राप्ति के लिए आत्मा और शरीर का अलग होना जरूरी’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

  हम धर्मगुरुओं से सुनते और शास्त्रों में पढ़ते आ रहे है कि शरीर और आत्मा अलग-अलग हैं। अशुभ कर्मो…
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