छहढाला पहली ढाल छंद 08

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छहढाला

पहली ढाल

पंचेन्द्रिय पशुओं के निर्बलता आदि अन्य दु:ख

कबहूँ आप भयो बलहीन, सबलनि करि खायो अतिदीन।
छेदन भेदन भूख पियास, भार वहन हिम आतप त्रास।।8।।

अर्थ – कभी यह जीव निर्बल पशु हुआ तो बलवान हिंसक पशुओं द्वारा खाया गया, इससे बहुत दु:खी हुआ। यदि खाया न गया और बचा रहा तो छेदा जाना, भेदा जाना, भूख-प्यास सहना, भारी बोझ ढोना, सदी, गर्मी सहना आदि अनेक प्रकार के दु:ख उठाता रहा।

विशेषार्थ – मायाचारी अर्थात् मन, वचन एवं काय की कुटिलता से, मिथ्या उपदेश देने से, परिग्रह में अधिक ममत्व रखने से, शीलव्रत भंग करने से नील एवं कापोत लेश्या युक्त परिणामों से, मरणकाल में आत्र्तध्यान करने से, जाति एवं कुल में दूषण लगने से तथा स्वर्ण, घी, तेल आदि में मिलावट करके बेचने से तिर्यंचगति में जन्म लेना पड़ता है।

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