दान और पूजा नहीं करने वाला है दानव – मुनि पूज्य सागर महाराज

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-चातुर्मास कलश स्थापना औऱ स्वस्ति मंगल आराधना से हुई अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज और मुनि अनुकरण सागर महाराज के चातुर्मास की शुरुआत
-चार महीनों तक बहेगी धर्म और आस्था की सरिता

उदयपुर- श्रावक का मुख्य कर्तव्य दान और पूजा है। जो दान और पूजा नहीं करता, वह श्रावक होते हुए भी तिर्यंच(दानव) के समान है। संसार में दान ही एक ऐसा माध्यम है, जिससे लेने और देने वाले दोनों को ही पुण्य प्राप्त होता है। यह बात अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने रविवार को अशोक नगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन(कांच मंदिर) मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना और स्वस्ति मंगल आराधना कार्यक्रम में हुए प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जिस धन का उपयोग धर्म के लिए होता है, वह धन चार गुना पुण्य के रूप में वापस आता है। यहां तक कि दान की अनुमोदना करने वाला पशु भी भोग भूमि में जन्म लेता है। मुनि श्री ने कहा कि जो व्यक्ति साधना और धर्म प्रभावना में अपने धन का उपयोग करता है, उसे साधु की साधना का सात प्रतिशत पुण्य के रूप में प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने जो अपरिग्रह का सिद्धांत दिया है, वह दान के लिए ही दिया है। कार्यक्रम में मुनि अनुकरण सागर महाराज ने चातुर्मास कलश स्थापना का महत्व बताया।
इससे पहले सुबह चातुर्मास कलश स्थापना, स्वस्ति मंगल आराधना कार्यक्रम अशोकिशनक नगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन(कांच मंदिर) मंदिर में हुआ। चातुर्मास मंगल कलश जुलूस के रूप में अशोक नगर में घुमाया गया। समारोह में 100 लोगों ने स्वस्ति मंगल आराधना की। सबसे पहले दीप प्रज्ज्वलन जय कुमार कांरवा , सुंदरलाल डागरिया, महावीर पटवा, रोशन चित्तौड़ा, खूबीलाल चित्तौड़ा, प्रकाश चित्तौड़ा ने किया। चित्र अनावरण श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के महामंत्री अशोक गोधा, अंतर्मुखी धर्म प्रभावना चातुर्मास समिति के समन्वयक नीलेश मेहता, ओमप्रकाश भोरावत, अंर्तमुखी सोशल मीडिया सेल के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश बैद ने किया। इस अवसर पर चातुर्मास पत्रिका का विमोचन दीपक गोधा, अशोक गोधा, चंदनमल जावड़िया, रमेश मेहता, सागवाड़ा से आए जैन समाज के लोगों ने किया। मंडप उद्घाटन रमेश पाटोदी ने किया। झंडारोहण प्रकाश चित्तौड़ा ने किया। समाज के महिला मंडल की ओर से अष्ट द्रव्यों की पूजा की गई। इस अवसर पर अंतर्मुखी प्रश्नमाला का विमोचन चंद्रप्रकाश बैद, राजेश कोठारी, सचिन अजमेरा, प्रदीप जोशी ने किया। अंतर्मुखी धर्म प्रभावना चातुर्मास समिति के समन्वयक अजित मानावत ने मुनि श्री को पिच्छी, राजेश और सपना कोठारी ने कमंडल, शांतिनाथ महिला मंडल ने शास्त्र भेंट किया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन जयकुमार कारवां ने किया। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष रोशन चित्तौड़ा, शांतिलाल गोधा, पवन मेहता, ओमप्रकाश भोरावत, अजित मानावत, तरुण चित्तौड़ा, अनिल प्रकाश संघवी, सुंदर लाल डागरिया, राजेश शाह, अजय सरिया, अमृतलाल जैन(अहमदाबाद), सुलोचना गांधी ने 12 बड़े कलशों की स्थापना की। इसके साथ ही तीन विशेष कलशोंं की स्थापना की गई। साथ ही 21 छोटे कलशों की भी स्थापना की गई। कीर्ति जैन ने समस्त विधि-विधान से कार्यक्रम पूरा करवाया। चातुर्मास स्थल पर जैन धर्म के पंच तीर्थ की मिट्टी के 101 डिब्बे भी रखे गए हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सागवाड़ा, बांसवाड़ा, हिम्मतनगर, किशनगढ़, ऋषभदेव आदि स्थानों से आए श्रावकों ने भी भाग लिया।

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