मुनि निंदा बनती है जीवन में अनेक दुखों का कारण-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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मुनि निंदा बनती है जीवन में अनेक दुखों का कारण-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज



-अशोक नगर स्थित श्रीशांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर(कांच मंदिर) में हुआ अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर 

महाराज और मुनि श्री अनुकरण सागर जी महाराज का पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम



उदयपुर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज और मुनि श्री अनुकरण सागर जी महाराज का पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम रविवार को अशोक नगर स्थित श्रीशांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर(कांच मंदिर) में हुआ। इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि पंच परमेष्ठी अर्थात् अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु की उपासना करने से पुण्य का संचय होता है। हमें इनके गुणों का चिंतन करना चाहिए। मुनि निंदा से अनेक दुख होते हैं। निंदक और उसके परिजन अनेक दुखों को भोगते हैं। पंच परमेष्ठी की आलोचना करने से शरीर में अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें मुनि के गुणों को देखकर उनकी आराधना और उपासना करनी चाहिए। मुनि निंदा के अनेक कुफल शास्त्रों में बताए गए हैं, जिनके बारे में भी मुनि श्री ने जानकारी दी। इससे पहले कार्यक्रम का प्रारंभ सीमा गोधा की ओर से प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद अखिल भारतीय दिगंबर जैन धर्म संरक्षणी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल कुमार सेठी, नई दिल्ली,कार्याध्यक्ष जमनाला हपावत  ने दीप प्रज्ज्वलन किया। चित्र अनावरण महासभा के राजस्थान अध्यक्ष राजेश शाह,राजेन्द्र कोठारी ,सुन्दरलाल डागरिया ने किया। कार्यक्रम में मुनि पूज्य सागर का अष्ट द्रव्य से पूजन समारोह में उपस्थित सभी श्रावकों द्वारा एक-एक करके किया गया। उनका पाद प्रक्षालन उपस्थित जन समूह ने किया। मुनि अनुकरण सागर का अष्ट द्रव्य से पूजन अजीत मानावत ने किया। मुनि पूज्य सागर को नई पिच्छी भेंट करने का लाभ जयमाला-प्रदीप चित्तौड़ा को मिला। वहीं उनकी पुरानी पिच्छी मधु-मनोहर चित्तौड़ा और साधना की पिच्छी राजेश शाह, मुंबई को प्राप्त हुई। मुनि अनुकरण सागर को नई पिच्छी सर्वेश जैन ने भेंट की और उनकी पुरानी पिच्छी रोशन चित्तौड़ा को मिली। कार्यक्रम में निर्मल कुमार सेठी ने कहा कि हमें प्राचीन तीर्थों का संरक्षण करना चाहिए तभी हम हमारी संस्कृति को बचा सकते हैं। पंथ और संत की आड़ में हम अपनी संस्कृति का विनाश न करें। अगर आचार्य और मुनि ही संस्कृति के पतन में सहयोगी बन जाएंगे तो कैसे हम अपने जैन धर्म को बचा पाएंगे।

कार्यक्रम में रोशन चित्तौड़ा ने आभार व्यक्त किया। निर्मल सेठी का स्वागत मंदिर अध्यक्ष रोशन चित्तौड़ा और अजीत मानावत ,नाथुलाल जैन ने किया। इस अवसर पर मुनि पूज्य सागर के आहार-विहार के संघपति के रूप में इच्छित 12 नामों में से राजेश शाह, मुंबई, रोशन चित्तौड़ा, उदयपुर, अशोक गोधा और अजीत मानावत, उदयपुर ने अपनी अनुमति प्रदान की ।

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