अंतर्मुखी के दिल की बात : हूमड़ पुरम् बने जैन समाज का केंद्र – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

आज हम बात करेंगे राजस्थान के डूंगरपुर जिले के भीलूड़ा के पास 50 बीघा जमीन पर बन रहे हूमड़ पुरम की। यहां पर समाज की आने वाली पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से विकसित करने लिए 33 भवन बनाने का प्रस्ताव है। यह भविष्य में जैन समाज का शिक्षा का एक बड़ा क्रेंद्र बनेगा। अभी यहां एक भवन बनकर तैयार है और आठवीं तक की कक्षा प्रारम्भ हो गई। कॉलेज की मान्यता प्राप्त भी हो चुकी है। भविष्य में कॉलेज प्रारम्भ हो जाएगा।

मैं यह बात इसलिए भी साझाकर रहा हूं क्योंकि योजना बहुत बड़ी है पर जैन समाज के लिए नामुमकिन नही है। अब जरूरत है हौसले की और कार्यकर्ताओं को सहयोग करने की। डूंगरपुर-बांसवाड़ा-उदयपुर जिले के जैन समाज के हर परिवार के हर सदस्य को एक संकल्प करना होगा कि हम अपने बच्चों को शिक्षा के लिए यहीं भेजेंगे, क्योंकि जैन समाज के पास धन की कमी नही पर मन, तन से हम नही जुड़ पाते हैं, इसलिए संस्थाओं का विकास नही हो पाता है।

आप यही सोचना की हूमड़ पुरम से अच्छी शिक्षा और जैन संस्कार दुनिया का कोई स्कूल या शिक्षण संस्थान नही दे सकता है। आप की यही सोच आपको अपने बच्चों को हूमड़ पुरम भेजने को मजबूरकर देगी। हूमड़ पुरम के आसपास 80-90 गांव है। सभी गांव एक-एक कर हूमड़ पुरम की भूमि पर जाकर भगवान की आराधना, जाप करे और भावना करे की यह क्षेत्र शिक्षा का गढ़ बने। साथ ही श्रमदान भी करें। जब आप वहां जाओगे और पूरा दिन रहोगे तो वह आपको अपना लगेगा। साल में एक गांव को 4 बार ही तो जाना है। आपका यह संकल्प हूमड़ पुरम के कार्यकर्ताओं को ऊर्जा देगा। उनमें और उमंग भरेगा। हूमड़ पुरम के विकास को जितनी जरूरत पैसे की है उससे अधिक जरूरत है उस क्षेत्र से आपके लगाव की। वह लगाव आपके वहां जाने से ही बनेगा। यह क्षेत्र आपके बच्चों को जैन संस्कार और संस्कृति से जोड़ेगा। यही भावना करता हूं।

इस क्षेत्र का संचालन कर रहा 18000 दिगम्बर जैन हूमड़ समाज आशीर्वाद का पात्र है जिसने यह कार्य हाथ में लिया बस यहां ध्यान केंद्र शुरू हो जाए तो इसका विकास और भी जल्दी हो जाएगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

अनंत सागर
अंतर्मुखी के दिल की बात
अढ़तालीसवां भाग
01 मार्च 2021, सोमवार, भीलूड़ा (राजस्थान)

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