कहानी:- ‘सफलता के लिए लगातार सीखते रहें’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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एक बार एक राजा ने एक लकड़हारे को अपने यहां नियुक्त किया। राजा उसके कार्य से काफी खुश था क्योंकि उसने पहले ही महीने लगभग 18 पेड़ों को काटा था। अगले महीने उस लकड़हारे ने काफी कोशिश की लेकिन वो केवल 15 पेड़ांे को ही काट पाया। तीसरे महीने वह अपनी पूरी ताकत लगा कर भी केवल 12 पेड़ांे को ही काट पाया। धीरे-धीरे उसकी पेड़ काटने की क्षमता कम होने लगी। एक दिन राजा उसके पास पंहुचा और उसकी क्षमता में कमी का कारण पूछा। बढई ने जवाब दिया, महाराज मेरी उम्र भी बढ़ रही है और शरीर की शक्ति भी कम हो रही है, इसी कारण मैं पहले जितना काम नहीं कर पा रहा हूं। यह सुनकर राजा ने पूछा, कितने समय पहले तुमने अपनी कुल्हाड़ी को धार लगाई थी? आश्चर्यचकित हो कर लकड़हारे ने जवाब दिया आज तक केवल एक ही बार धार लगाई है। तब राजा ने समझाया, इसी वजह से तुम्हारी पेड़ काटने की क्षमता में दिन प्रतिदिन कमी आ रही है। अपनी कुल्हाडी में समय-समय पर धार लगाओ, तो तुम्हारी क्षमता कभी कम नहीं होगी।
सीख – काम को आसानी से करने के लिए लगातार सीखना जरूरी है।

अनंत सागर
कहानी
(इकतीसवां भाग)
29 नवम्बर, 2020, रविवार, बांसवाड़ा
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी)

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