मैं अच्छा तो जग अच्छा – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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mai achchha to jag achchha

वर्तमान में अधिकांश व्यक्तियों से यह सुनने में आता है कि जमाना बड़ा खराब है। इससे बड़ी मूर्खता की बात और क्या होगी। यह चिंतन का विषय है कि जब तुम यह जानते हो की जमाना खराब है तो फिर क्यों तुम इस जमाने में रहते हो। तुम अपने आपको इस जमाने से अलग कर अपनी अलग पहचान क्यों नहीं बनाते हो? व्यक्ति के खुद के इरादे कमजोर, बेबुनियाद और नकारात्मक होते हैं और वह अपनी कमजोरी छुपाने के लिए दुनिया को खराब बताता रहता है।

वर्तमान में ज्यादातर लोग केवल खुद को अच्छा साबित करने की कोशिश में जमाने को खराब साबित करने में लगे हुए हैं। दूसरों को खराब कहने का स्थान पर यदि व्यक्ति यह सोचे कि ‘मैं अच्छा तो जग अच्छा’ तो उसी दिन से यह जमाना भी अच्छा नजर आने लगेगा और व्यक्ति खुद को भी अच्छा बनाने के काम में लगेगा। दूसरों की कमजोरी और बुराई करके कभी भी खुद की इस जमाने से अलग पहचान नहीं बना सकते। कभी सोचा की खुद ने अपने जीवन में प्रतिदिन 24 घंटों में से कितना-कितना समय कहां-कहां खर्च किया। आप 8 घंटे सोने में, 12 घंटे दूसरों की बुराई करने में, उसकी तरक्की को जानने में और दूसरे की सोच के अनुसार काम करने में, 2 घंटे खाने-पीने में और शेष बचे 2 घंटे अपने दैनिक कार्यों में बीत रहे हो। अब ऐसी स्थिति में बताओ कि तुमने अपने लिए कौनसा समय बचाया। यदि व्यक्ति खुद को जमाने से अलग साबित करना चाहता है तो उसे प्रतिदिन 12 घंटे का उपयोग खुद के लिए करना होगा। अपने विचारों को विस्तृत करना होगा। जिस दिन वह ऐसा करने लगेगा उस दिन से उसके पास दूसरों को और जमाने को देखने का समय ही नहीं रहेगा। यह दिन व्यक्ति के जीवन का सबसे खुशी वाला दिन होगा, क्योंकि इसी से जीवन की मंजिल का रास्ता मिलेगा। जो व्यक्ति जमाने को अपने हिसाब से चलाना चाहता है वह अपने रास्ते से भटक जाता है और फिर दुनिया के पीछे-पीछे दौड़ने लगता है।

अनंत सागर
अंतर्भाव
अड़तालिसवां भाग
26 मार्च 2021, शुक्रवार, भीलूड़ा (राजस्थान)

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