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दीपों से जगमगाया शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर

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होम्बुज में हर्षोल्लास से मनाया जाता है नवरात्र पर्व : – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

धार्मिक संस्कृति से ओत-प्रोत भारत संसार का ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के पर्व और त्यौंहार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सभी धर्मों…

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शिष्य की साधना देख गुरु स्वयं माैजूद रहे आहार चर्या में, 54 दिन बाद मुनि ने किया आहार में अन्न का ग्रहण

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भीलूड़ा/ डूंगरपुर । भीलूड़ा में चातुर्मासरत अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने 54 दिन बाद मंगलवार काे अन्न का आहार…

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धार्मिक संस्कृति से ओत-प्रोत भारत संसार का ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के पर्व और त्यौंहार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सभी धर्मों के त्यौंहार और पर्व यहां बड़े उल्लास, उमंग और श्रद्धा से मनाए जाते हैं। नवरात्रि जैसा त्यौंहार तो सभी को आन्तरिक शक्ति से परिपूर्ण कर देता…

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मां पद्मवाती की मूर्ति का भव्य श्रंगार

 

भीलूड़ा। अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सान्निध्य में शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर नौ दिन तक जिनेन्द्र भगवान की भक्ति और मां पद्मवाती की आराधना की गई। महोत्सव के अंतिम दिन बड़े ही उत्साह से मां पद्मावाती का स्वर्णआभूषण से भव्य श्रंगार किया जाता है। कर्नाटक में इस प्रकार का उत्सव मनाने की परम्परा रही है।प्रातःकाल भगवान पार्श्वनाथ का पंचामृत अभिषेक हितेश जैन,मीनेष जैन,प्रतिभा जैन ने किया। उसके बाद मां पद्मवाती का श्रृंगार किया गया। शाम 7 बजे पंडाल में मां पद्मवाती की मूर्ति को साड़ी, चूड़ी,फल,फूल और रोशनी से सजाया गया और 1008 दीपकों का स्वस्तिक बनाकर सहस्त्रनाम के मंत्र बोलते हुए दीप जलाए गए।
मां पद्मावती की आराधना के मुख्य यजमान प्रेरणा नरेंद्र शाह सागवाड़ा थे। इसकी साथ ही सुनीता कमलेश जैन परिवार ने भी प्रमुख यजमान बनकर आराधना की।  दीपिका जैन, सुलोचना जैन, मोनिका जैन, अंजली जैन, हिमानी जैन, संध्या जैन, प्रियंका जैन,संगीता जैन, प्रतिभा जैन, सुषमा जैन ने भी मां पद्मावाती की गोद भराई की और सभी आराधना करने वाले श्रावकों ने 1008 दीप जलाए। प्रत्येक परिवार ने मां पद्मावती को कुमकुम अर्चना,अर्घ्य,दीपक फल भी समर्पित किए। मुख्य कलश स्थान मोहित जैन व चार कलश की स्थापना का लाभ हितेश जैन, दीपक जैन,पंकज जैन,तृष्टि जैन को मिला। आरती चेतना जी और अष्ट द्रव्य समर्पण करने का लाभ धर्मेंद्र जैन को मिला।
नौदिवसीय आराधना क्षुल्लक अनुश्रवण और तृष्टि दीदी के मार्गदर्शन में एवं हितेश जैन मीनेष  जैन निदेशन में सम्पन्न हुए। संचालन धमेंद्र जैन ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से रमणलाल जैन, अरविंद जैन, ओमप्रकाश जैन,कांतिलाल जैन,जयंतीलाल जैन,कमलेश जैन,ललित जैन,अनोखी जैन,मोहित जैन,सुभाष जैन,चंद्रकांत शाह आदि उपस्थित थे।

इस मौके पर अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि तीर्थंकर के यक्ष – यक्षिणी ने धर्म प्रभावना का सहयोग किया है। उनके उपकार का स्मरण करते हुए सम्मान स्वरूप पूजन आराधना करना हम श्रावकों का कर्तव्य है। शास्त्रों में उल्लेख है कि चक्रवर्ती भरत ने 9 दिन तक देवी- देवताओं की आराधना की थी, तभी से यह परम्परा चली आ रही है। इनकी आराधना से हमारे धर्म प्रभावना में सहयोग मिलता है। देवी देवताओं की आराधना से सम्यक्त्व में मलिनता नहीं आती, बल्कि धर्म प्रभावना होता है।

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होम्बुज में हर्षोल्लास से मनाया जाता है नवरात्र पर्व : – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

धार्मिक संस्कृति से ओत-प्रोत भारत संसार का ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के पर्व और त्यौंहार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सभी धर्मों के त्यौंहार और पर्व यहां बड़े उल्लास, उमंग और श्रद्धा से मनाए जाते हैं। नवरात्रि जैसा त्यौंहार तो सभी को आन्तरिक शक्ति से परिपूर्ण कर देता है। इस लेख में हम जानेंगे जैन धर्मावलम्बियों के प्रमुख तीर्थ होम्बुज देवी मंदिर के बारे में जानेंगे जहां नवरात्रि का पर्व बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है और यह प्रमाणित करता है कि जैन धर्म में नवरात्र कितना महत्वपूर्ण अनुष्ठान व पर्व है –

अतिशयकारी होम्बुज देवी

देश-विदेश से भक्तगण माता होम्बुज पद्मावती के दर्शनों के लिए आते हैं। होम्बुज पद्मावती कर्नाटक के मनोरम तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर चमत्कारी प्रभावों से आज भक्तों में बड़ा ही प्रसिद्ध हो गया है। सातवीं सदी में उत्तर मथुरा के उग्रवंशी जिनदत्त राय ने यहां अपने राज्य की स्थापना की थी। यह राजा जैन धर्मावलम्बियों की यक्षिणी पदमावती देवी के परम भक्त थे। यहां पर कुल दस मंदिर हैं, परन्तु मुख्य मंदिर अतिशयकारी पद्मावती जैन मंदिर है जो भगवान पार्शवनाथ मंदिर के साथ स्थित है।

मनोरथ होते हैं यहां पूर्ण

यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और देवी के वर प्रसाद से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। कहा जाता है कि यहां से आज तक कोई भक्त खाली हाथ नहीं गया और नवरात्रों में तो यहां देवी के दर्शनों के लिए भक्त उमड़ पड़ते हैं। माता की मू्र्ति जितनी मनोहारी है उतनी ही उनकी ख्याति है। यहां देवी पदमावती अपने चैतन्य और जीवन्त रूप में उपस्थित हैं।

राजवंश को मिली श्रेष्ठ महिला शासक

माता की भक्ति और शक्ति का ही प्रताप है कि इस राजवंश में श्रेष्ठ महिला शासकों चाकल देवी, कालल देवी और शासन देवी आदि जैसी कई शक्तिशाली महिला शासक मिली जिन्होंने शासन की बागडोर संभाली। होम्बुज की गुरुपरंपरा कुन्दकुन्दानवयांतर्गत नंदी संघ से सम्बन्धित है। इसके भट्टारक स्वामी देवेन्द्र कीर्ति के नाम से जाने जाते हैं जो समस्त क्षेत्र की व्यवस्था का प्रबन्धन करवाते हैं तथा साथ ही अनुष्ठान, धार्मिक कार्य और समारोह उन्हीं के सानिध्य में आयोजित होते हैं।

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“छोटी गलतियां बड़े कष्ट का कारण बनती हैं”

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