राम-लक्ष्मण का अतुलनीय भातृ-प्रेम – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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पद्मपुराण पर्व 88 में राम-लक्ष्मण के राज्याभिषेक को लेकर चर्चा की गई है। इस चर्चा से शिक्षा मिलती है कि भाई-भाई का प्रेरण कैसा होता है।
राम वन से लौटे और उनके राज्याभिषेक की तैयारियां की जाने लगीं। अनेक विद्वान, मंत्री आदि राम के पास गए और उनसे बोले कि राज्याभिषेक की स्वीकृति दीजिए। तब राम ने कहा, राजाओं का राजा लक्ष्मण जब मुझे प्रतिदिन नमस्कार करता है तो फिर मुझे राज्य की क्या आवश्यकता है। इसलिए आप लक्ष्मण का राज्याभिषेक कीजिए। इस प्रकार कहने पर सभी लोग राम का अभिनंदन कर लक्ष्मण के पास गए और वहां जाकर सभी ने लक्ष्मण से राज्याभिषेक की स्वीकृति मांगी। लक्ष्मण ने कोई उत्तर नहीं दिया और वे सबको लेकर राम के पास गए। वहां जाकर राम से राज्याभिषेक की बात कही। दोनों भाईयों में प्रेम इतना था कि दोनों की साथ ही राज्याभिषेक की प्रक्रिया की गई। दोनों भाइयों का अभिषेक किया गया और मुकुट, अंगद, हार और कुण्डलों से उन्हें विभूषित किया गया। यह प्रसंग, हम सबके लिए प्रेरणादायक है कि भाई-भाई के बीच प्रेम कैसा होना चाहिए।
अनंत सागर
प्रेरणा
3 जून 2021, गुरुवार
भीलूड़ा (राज.)

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