तेरहवां दिन : संतान को शुभकर्म की प्रेरणा दें – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

label_importantचिंतन, मौन साधना

मुनि पूज्य सागर की डायरी से

आज चिंतन में चिन्ता थी। पिता अपनी संतान को धन,वैभव,जमीन आदि देना अपना कर्तव्य मानता है, यही वर्तमान में चल भी रहा है। हम सब यह समझ कर देते है कि संतान को सुख,शांति और समृद्धि मिलेगी। यही जीवन का सबसे बड़ा भ्रम है। राम और राम के जीवन पर नजर डालने से यह भ्रम टूट जाएगा। रावण के पास धन,वैभव,जमीन,रिद्धि सब कुछ था, पर जीवन में उसे शांति,सुख और समृद्धि नहीं मिली। जो था, वह भी चला गया, यहां तक कि परिवार का भी नाश हो गया।
राम जब जंगल के लिए घर से निकले तो उनके पास कुछ नहीं था, पर धीरे- धीरे उनका वैभव,शक्ति,धन बढ़ता गया। यह सब इतना बढ़ा कि रावण जैसे शक्तिशाली योद्धा पर भी उन्होंने विजय प्राप्त कर ली। यह अब कैसे हुआ। जिसका था वह भी चला गया और जिसके पास कुछ नहीं था, उसका सब कुछ हो गया। यह सब शुभ-अशुभ कर्म से हुआ। राम और रावण को जीवन से समझना होगा कि पिता संतान को धन आदि के बजाए  शुभ कर्म करने की प्रेरणा दे, उन्हें संतों के पास,तीर्थो पर ले जाए, समय- समय पर धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन करे तभी वह अपनी संतान को शुभकर्म दे सकता है।

मंगलवार, 17 अगस्त, 2021 भीलूड़ा

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