कहानी:- ‘गुजरा हुआ समय दोबारा नहीं आता’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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एक नगर में एक बहुत ही अमीर आदमी रहता था। उस आदमी ने अपना सारा जीवन पैसे कमाने में लगा दिया। उसके पास इतना धन था कि वह उस नगर को भी खरीद सकता था लेकिन उसने अपने संपूर्ण जीवन भर में कभी किसी की मदद तक नहीं की थी। इतना धन होने के बावजूद, उसने अपने लिए भी उस धन का कभी उपयोग नहीं किया, न कभी अपनी पसंद के कपड़े खरीदे ना भोजन एवं अन्य इच्छा की पूर्ति तक नहीं की। वह केवल अपने जीवन में पैसे कमाने में व्यस्त रहा, वह इतना व्यस्त एवं मस्त हो गया पैसा कमाने में कि उसे उसके बुढ़ापे का भी पता नहीं चला और वह जीवन के आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया। इस तरह उसके जीवन का अंतिम दिन भी नजदीक आ गया और यमराज उसके प्राण लेने धरती पर आये, जिसे देख कर वह आदमी डर गया। यमराज ने कहा, अब तेरे जीवन का अंतिम समय आ गया है और मैं तुझे अपने साथ ले जाने आया हूं। सुनकर वह आदमी बोला, प्रभु अभी तक तो मैंने अपना जीवन जिया भी नहीं मैं तो अभी तक आपने काम में व्यस्त था अतः मुझे अपनी कमाई हुई धन दौलत का उपयोग करने के लिए समय चाहिए। यमराज ने उत्तर दिया मैं तुम्हें और समय नहीं दे सकता, तुम्हारे जीवन के दिन समाप्त हो गये हैं और अब दिनों को नहीं बढाया जा सकता। यमराज की यह बात सुनकर उस आदमी ने कहा, प्रभु मेरे पास इतना पैसा है कि आप चाहो तो आधा धन लेकर मुझे जीवन का एक वर्ष और दे दीजिये। प्रतियुत्त्तर में यमराज ने कहा ऐसा संभव नहीं है। इस पर आदमी ने कहा, आप चाहो तो मेरा 90 प्रतिशत धन लेकर मुझे 1 महीने का समय ही दे दीजिए। यमराज ने फिर मना कर दिया। फिर आदमी ने कहा, आप मेरा सारा धन लेकर 1 घंटे का समय ही दे दीजिये। तब यमराज ने उसको समझाया, बीते हुए समय को धन से दोबारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इस प्रकार जिस आदमी को अपने धन पर अभिमान था, उसे अब वह सब व्यर्थ लगने लगा क्योंकि उसने अपना संपूर्ण जीवन उस व्यर्थ की चीज को कमाने में लगा दिया जो आज उसे जिंदगी का 1 घंटा भी खरीद के नहीं दे पाई। दुखी मन से वह अपनी मौत के लिए तैयार हो गया।
सीख – जीवन बहुत अमूल्य है, इसको व्यर्थ न जानें दें।

अनंत सागर
कहानी
(पैतीसवां भाग)
27 दिसम्बर, 2020, रविवार, बांसवाड़ा
‘गुजरा हुआ समय दोबारा नहीं आता’
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी)

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