विज्ञान के साथ धर्म का आलम्बन लें – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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पद्मपुराण पर्व अस्सी में एक बहुत प्रेरणादायक कहानी आई हैआओ पढ़ते हैं – 

शोभपुर नगर में भद्राचार्य नामक मुनिराज विराजमान थे।  उस नगर का राजा अमल था जो कि गुणों से परिपूर्ण था। राजा प्रतिदिन आचार्य श्री के दर्शन और सेवा करने आता था। एक दिन आने पर उसे उस स्थान पर अत्यंत दुर्गन्ध आई। एक कोढिनी के शरीर से उतपन्न हुई वह दुर्गन्ध इतनी भयंकर थी कि राजा उसे सहन नही कर सका और शीघ्र ही अपने घर चला गया। वह कोढिनी स्त्री किसी अन्य स्थान से आकर उस मंदिर के समीप ठहरी थी। उसी के घावों से वह दुर्गन्ध निकल रही थी। उस स्त्री ने भद्राचार्य के पास अणुव्रत धारण किए।  अणुव्रत धारण करने के बाद आयु पूर्ण होने पर वह मरकर स्वर्ग गई।

हम भी कोरोना काल में विज्ञान के साथ धर्म का आलम्बन लें और कोरोना से बचे तथा इसे दूर भगाएं।  

सीख – जीवन में आने वाले रोगदुःखअशांति को धर्म के प्रभाव से दूर किया जा सकता है।

अनंत सागर
कहानी (पचपनवां भाग )
16 मई , 2021, रविवार
भीलूड़ा (राज.)

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