जो प्रशंसा के साथ गलतियां भी बताए, वही सच्चा हितकारी-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

जो प्रशंसा के साथ गलतियां भी बताए, वही सच्चा हितकारी-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज यह तुमने अच्छा किया। यह तुमने गलत किया। तुम्हें अपनी गलती

सत्य बोलें, विश्वसनीय बनें -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

सत्य बोलें, विश्वसनीय बनें -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर आगम का एक-एक शब्द कल्याणकारी दुनिया में गवाही उसी की मान्य है, जो स्वयं विवादों से रहित

व्यक्ति की नही उसके गुणों की होती हैं पूजा- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

व्यक्ति की नही उसके गुणों की होती हैं पूजा- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर व्यक्ति के भौतिक रूप नहीं, बल्कि उसमें समाहित जीवन मूल्यों का महत्व

सद्भावी गुरू के सान्निध्य से ही संभव है सम्यक दर्शन – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

सद्भावी गुरू के सान्निध्य से ही संभव है सम्यक दर्शन – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर सम्यक दर्शन अर्थात सकारात्मक सोच के बिना जीवन का हर

भगवान जिनेंद्र के उपदेशों पर नहीं होनी चाहिए कोई शंका-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

भगवान जिनेंद्र के उपदेशों पर नहीं होनी चाहिए कोई शंका-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज आज व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी गुणों एवं आचरण से की

जीवन के सुख-दुःख हमारे कर्मों का प्रतिफल -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

जीवन के सुख-दुःख हमारे कर्मों का प्रतिफल -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज जीवन में सुख-दुख और उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। यह सब कर्मों का प्रतिफल

रत्नत्रय की पालना से पवित्र हो जाती है देह -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रत्नत्रय की पालना से पवित्र हो जाती है देह -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज मानव शरीर सप्तधातु रस, रक्त, मांस, मेद ,अस्थि, मज्जा एवं शुक्र

चमत्कार की चाह में न छोडे़ें सम्यक कर्म की राह- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

चमत्कार की चाह में न छोडे़ें सम्यक कर्म की राह- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज आधुनिक युग में जीवन मूल्यों की पहचान के स्थान पर

संसार के सभी सुखों में महत्वपूर्ण है शांति-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

संसार के सभी सुखों में महत्वपूर्ण है शांति-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज संसार के सभी सुखों में सबसे महत्वपूर्ण है शांति। दुनिया के सभी वैभव

कपटरहित आंतरिक स्नेह ही है सच्चा वात्सल्य -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

कपटरहित आंतरिक स्नेह ही है सच्चा वात्सल्य -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज मानव मात्र के प्रति कपटरहित आंतरिक स्नेह होना वात्सल्य गुण है। सम्यग्दर्शन के