ज्ञान और आचरण के साथ श्रद्धा है जरूरी- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ,

ज्ञान और आचरण के साथ श्रद्धा है जरूरी- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज , ज्ञान और आचरण की कीमत तभी है जब उसके साथ श्रद्धा

भावों की निर्मलता से ही कर्मों की निर्जरा -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

भावों की निर्मलता से ही कर्मों की निर्जरा -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज वेश कैसा भी हो पर जब तक अंदर से भाव निर्मल नहीं

सम्यगदर्शन से दुख में भी होता है सुख का अनुभव -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

सम्यगदर्शन से दुख में भी होता है सुख का अनुभव -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज संसार में दुःख के अनेक कारण हैं, जिनके कारण हम

जैसा करेंगे, वैसा फल मिलेगा -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

जैसी करनी वैसी भरनी। जैसा करोगे वैसा ही फल मिलेगा। जिस मनुष्य ने देव, शास्त्र, गुरु के लिए अपना मन, वचन, काय समर्पित कर दिया

जिनेन्द्र भगवान पर रखें श्रद्धा-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

जिनेन्द्र भगवान पर रखें श्रद्धा-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज तिर्यंच प्राणी मेढ़क में जिनेन्द्र भगवान पर श्रद्धा रखते हुए उसने भगवान महावीर के दर्शन के

धर्म से मिलता है अनंतकाल तक का सुख -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

धर्म से मिलता है अनंतकाल तक का सुख -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज संसारी इच्छाओं की पूर्ति कभी भी पूरी नहीं की जा सकती है,

सम्यगदर्शन से ही जीवन का उद्धार -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

सम्यगदर्शन से ही जीवन का उद्धार -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एक शेर तीर्थंकर  महावीर बना । शास्त्र में आया है कि शेर सिंह हिरण

सर्वकल्याण का भाव पैदा करता है तीर्थंकर पद का पुण्य बंध – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

सर्वकल्याण का भाव पैदा करता है तीर्थंकर पद का पुण्य बंध – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ईश्वर बनने की चाह में प्राणी ईश्वर की

संसार के सारे सुख पुण्य से मिलते हैं-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

संसार के सारे सुख पुण्य से मिलते हैं-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज संसार में सारे सुख, सम्मान, पद, कुल, जाति, धन, बड़प्पन, इन्द्र आदि पद

तीर्थंकर की वाणी पर ना हो कोई संदेह-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

तीर्थंकर की वाणी पर ना हो कोई संदेह-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज जो धर्म की बात को किसी प्रकार के संदेह से रहित जानता है।