हृदय में जिनेन्द्र भगवान हों तो कर्म मल शिथिल पड़ जाते हैं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

हृदय में जिनेन्द्र भगवान हों तो कर्म मल शिथिल पड़ जाते हैं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज हींग की डिब्बी में हलवा

मूलाचार ग्रंथ की ये गाथाएं आपके भावों को बनाएंगी निर्मल – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

मूलाचार ग्रंथ की ये गाथाएं आपके भावों को बनाएंगी निर्मल – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज धर्मानुरागी बंधुओं….आज हम आचार्य वट्टकेर द्वारा रचित

अपनी गलतियों और कमियों को स्वीकार करना सीखो – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

अपनी गलतियों और कमियों को स्वीकार करना सीखो – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज एक राजा था। उसने अपने मन्त्री को बुलाकर कहा

चरवाहे ने ऐसे समझाया राजा को भगवान का काम – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

चरवाहे ने ऐसे समझाया राजा को भगवान का काम – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज एक राजा था। उसने अपने मन्त्री को बुलाकर कहा

भय की छाया में नए वर्ष में प्रवेश ना करें – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

भय की छाया में नए वर्ष में प्रवेश ना करें – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज धर्मानुरागी बंधुओं…अंग्रेजी नव वर्ष 2021 आज से

मेरी आत्मा ही परमात्मा है – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर

मेरी आत्मा ही परमात्मा है – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर संसारी भव्य आत्मा अर्थात सकारात्मक सोच वाली आत्म अपनी आत्म-साधना से स्वयं की आत्मा को

व्रतों से आत्मा परमात्मा बनती है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

व्रतों से आत्मा परमात्मा बनती है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज पाप कर्म के उदय से संसारी आत्म यह सोचती है कि वर्तमान

धर्म रहित कार्य से व्यक्ति नरक को प्राप्त करता है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

धर्म रहित कार्य से व्यक्ति नरक को प्राप्त करता है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज जीवन में दुःख के कारणों का निरंतर चिंतन

दशरथ मुनि का आत्मचिंत्तन – मुनि श्री पूज्य सागर जी

दशरथ मुनि का आत्मचिंत्तन – मुनि श्री पूज्य सागर जी जब राजा दशरथ मुनि बन गए, उस समय उन्हें अपने पुत्र आदि के प्रति स्नेह

जो कल्याणकारी वचन कहे या सुने वही मानव बाकी पुतले – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

जो कल्याणकारी वचन कहे या सुने वही मानव बाकी पुतले – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज पद्मपुराण के पर्व 5 में शरीर और