‘इन सात स्थानों पर दो दान’ -अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

‘इन सात स्थानों पर दो दान’ -अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज किसी भी देश की पहचान उसकी संस्कृति और संस्कारों से होती है।

मति भ्रष्ट करता है शराब का सेवन -अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज

मति भ्रष्ट करता है शराब का सेवन -अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज इतिहास के पन्नों को पढ़ें तो पता लग जाएगा कि भारत को

श्रावक : -पाप कर्म की निर्जरा के लिए करें प्रतिक्रमण-अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

श्रावक : -पाप कर्म की निर्जरा के लिए करें प्रतिक्रमण-अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज परमात्मा और परमात्मा के उपदेश को मानने वाले मनुष्य

श्रावक- मोक्ष की यात्रा में हैं सात परम स्थान- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

श्रावक- मोक्ष की यात्रा में हैं सात परम स्थान- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज संसार से मोक्ष की यात्रा तय करने के लिए

धर्म के लिए किया गया दान सर्वदोष रहित होता है- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

धर्म के लिए किया गया दान सर्वदोष रहित होता है- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज संसार में सांसारिक जीवन जीने के लिए धन

श्रावक:-‘अष्टद्रव्य की पूजा के फल’ – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

श्रावक:-‘अष्टद्रव्य की पूजा के फल’ – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज श्रावक अपने पाप कर्मों को निर्जरा पूजन आदि के द्वारा करता है

श्रावक:-‘जिनेन्द्र देव की भक्ति से ही मुक्ति सम्भव है’-अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

श्रावक:-‘जिनेन्द्र देव की भक्ति से ही मुक्ति सम्भव है’-अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज श्रावक का कर्तव्य है कि वह जिनेन्द्र भगवान की भक्ति

श्रावक:- ‘ऋद्धिधारी मुनियों की आराधना कर कोरोना से स्वयं को बचाएं’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

शरीर स्वस्थ हो तो धार्मिक, सामाजिक कार्य अधिक उत्साह से हो पाते हैं। आज शरीर में कई तरह के रोग होने लगे हैं। रोगों को

श्रावक:- ‘सुखी जीवन के लिए धन नहीं पुण्य कमाएं’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

नीम के पत्तों के रस में कितनी भी शक्कर मिलाओ पर नीम के पत्तों के रस का स्वाद कड़वा ही रहेगा। वह मीठा नही हो

श्रावक :- ‘सत्कर्म को लोभ से नहीं, मानव-धर्म समझकर करें ’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

भगवान की पूजन और भक्ति से, संतों की सेवा से, धार्मिक पुस्तकें पढ़ने से मुझे स्वर्ग या संसारी सुख मिल जाएगा… इस भाव से कुछ