वैरभाव का दुख कई भवों तक भोगना पड़ता है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी
वैरभाव का दुख कई भवों तक भोगना पड़ता है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी वैरभाव अनेक जन्मों तक दुःख का कारण बनता है। पद्मपुराण
निर्मल भाव से ही होते है अच्छे कर्म – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी
निर्मल भाव से ही होते है अच्छे कर्म – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी निर्मलभाव को धारण करने वाला ही अच्छे कर्म कर सकता है।
कर्म किसी को छोड़ता नहीं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज
कर्म किसी को छोड़ता नहीं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज पद्मपुराण में रावण के जीवन का एक प्रसंग आता है। आप सब जानें
अपनी कुल नगरी वापस पाने के लिये रावण ने की दिग्विजय – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज
अपनी कुल नगरी वापस पाने के लिये रावण ने की दिग्विजय – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज पद्मपुराण में एक प्रसंग है जिसमें रावण
कर्मों के खेल निराले – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज
कर्मों के खेल निराले – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज महलों में सोने वाला वन-वन भटकता है। संगीत की आवाज सुनकर उठने वाले की
सामने वाला भले ही कमजोर हो पर कर्म बलवान होते हैं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज
सामने वाला भले ही कमजोर हो पर कर्म बलवान होते हैं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज कभी किसी को कमजोर समझकर पीड़ा, कष्ट
कर्म के उदय से बदलते हैं मनुष्य के भाव – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
कर्म के उदय से बदलते हैं मनुष्य के भाव – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज पद्मपुराण के पर्व 72 में रावण और सीता
कर्म ही हैं जो बुद्धि फिरा देते हैं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
कर्म ही हैं जो बुद्धि फिरा देते हैं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज राम और रावण का युद्ध होना था। उसके एक
अशुभ कर्म का उदय हो तो कुछ समझ नहीं आता – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
अशुभ कर्म का उदय हो तो कुछ समझ नहीं आता – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज पद्मपुराण के पर्व 76 में लक्ष्मण और
ऐसे हुआ ‘ दिवाली खुशियों वाली ‘ अभियान का जन्म
ऐसे हुआ ‘ दिवाली खुशियों वाली ‘ अभियान का जन्म मेरा चातुर्मास उदयपुर में चल रहा है । प्रवचन और अन्य धार्मिक कार्यों में समय
