जब तक संसार है तब तक विषयों से यह प्राणी तृप्त नहीं होता है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
जब तक संसार है तब तक विषयों से यह प्राणी तृप्त नहीं होता है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण पर्व तिरासी में वैराग्य
आत्मचिंतन से ही दुःख होंगे दूर – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
आत्मचिंतन से ही दुःख होंगे दूर – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज जीवन में दुख की अनुभूति तभी कम होती है जब व्यक्ति आत्मचिंतन करता
भरत का चिन्तन सभी के लिए चिन्तनयोग्य – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
भरत का चिन्तन सभी के लिए चिन्तनयोग्य – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण पर्व 85- 86 का प्रसंग है। भरत ने पूर्व भव का
धर्मात्मा की सेवा में बड़ा पुण्य – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
धर्मात्मा की सेवा में बड़ा पुण्य – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज अंतरात्मा में यही सोचना चाहिए कि मुनियों की सेवा, दर्शन और आहार दान
चिंतन में सामाजिक पालना – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
चिंतन में सामाजिक पालना – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण पर्व 96 में राम के मन में उत्पन्न हुए विचारों का प्रसंग आया है।
तीन लोकों में कहीं भी सुख नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
तीन लोकों में कहीं भी सुख नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पापकर्म के प्रकट होने से सीता वन में रो रही थीं और
कितने भी बड़े हो जाएं, पद की गरिमा बनाए रखें – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
कितने भी बड़े हो जाएं, पद की गरिमा बनाए रखें – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण के पर्व 80 पर राम से प्रेरणा लेने
प्रेरणा : कर्म का खेल समझ, खुद को धर्म में लगाओ
प्रेरणा : कर्म का खेल समझ, खुद को धर्म में लगाओ पद्मपुराण के पर्व 78 कुम्भकर्णादि के जीवन का एक प्रसंग है जो हम सब
अतुलनीय है राम और भरत की समर्पण भावना – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
अतुलनीय है राम और भरत की समर्पण भावना – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज परिवार में एक दूसरे के प्रति समर्पण का भाव, त्याग, विनय ही परिजनों
धर्म साधना करने वाले साधुओं के चरणों में हर रोग का उपचार है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
धर्म साधना करने वाले साधुओं के चरणों में हर रोग का उपचार है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ऐसे सम्पूर्ण रोग, शोक जिनका इलाज विज्ञान
