युद्ध मैदान में ही वैराग्य – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
युद्ध मैदान में ही वैराग्य – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण के पर्व 89 में एक प्रसंग आया है-युद्ध मैदान में युद्ध के दौरान
कर्मों में सुधार से उद्धार सम्भव – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
कर्मों में सुधार से उद्धार सम्भव – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज कर्म बड़े विचित होते हैं। देखो, जिस त्रिलोकमण्डल हाथी को राम और लक्ष्मण अयोध्या
समय बड़ा बलवान – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
समय बड़ा बलवान – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज शुभ और अशुभ कर्मफल कब उदय में आ जाए, कोई नहीं जानता। पद्मपुराण पर्व 96 में
मनचाही वस्तु पर भी अधिकार नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
मनचाही वस्तु पर भी अधिकार नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण के पर्व 90 में प्रसंग आया है। यह प्रसंग हमें संदेश देता
दुख का कारण कर्म – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
दुख का कारण कर्म – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण पर्व 97 में कर्म के कारण राम और सीता क्या सोचते हैं इसका प्रसंग
कर्म सिद्धांत – सीता के वन जाने के बाद राम की व्याकुलता – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
कर्म सिद्धांत – सीता के वन जाने के बाद राम की व्याकुलता – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज कर्म विचित्र हैं। इनकी व्यवस्था भी विचित्र
समाज के लिए समर्पण के साथ नवाचार करने वाला हो महासभा का नया अध्यक्ष- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
महासभा को अपना नया अध्यक्ष चाहिए। निर्मल जी सेठी के स्वर्गवास से एक महत्वपूर्ण जगह खाली हो गई है। इसके लिए अलग-अलग स्वर उठने लगे
शास्त्र के स्वाध्याय से होने वाला ज्ञान अमृत के समान है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
शास्त्र के स्वाध्याय से होने वाला ज्ञान अमृत के समान है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज शास्त्र स्वाध्याय ही दुःखों से बचा सकता है
वैक्सीन नहीं तो कुछ नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
वैक्सीन नहीं तो कुछ नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज हम बोल चाल की भाषा में बोलते है ना कि एक मछली पूरे तालाब
मीडिया की नई प्रौद्योगिकी से जुड़ना होगा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
मीडिया की नई प्रौद्योगिकी से जुड़ना होगा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज जैन समाज समृद्ध है। इसमें बुद्धिजीवी, त्यागी, ज्ञानी और अनेक चिंतक हैं,
