ब्रह्मचर्य व्रत में दोष के कारण – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

ब्रह्मचर्य व्रत में दोष के कारण – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पुरूष का स्त्री से, स्त्री का पुरुष से, पुरुष का पुरुष से, स्त्री

जो अपना नहीं उसमें ममत्व रखना परिग्रह- – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

जो अपना नहीं उसमें ममत्व रखना परिग्रह- – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज जो अपना नहीं हो उसमें मूर्च्छा- ममत्व रखना, आवश्कता से अधिक का

लोभ कम करने के लिए करें परिमित परिग्रह व्रत का पालन-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

लोभ कम करने के लिए करें परिमित परिग्रह व्रत का पालन-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज लोभ को कम करने के लिए परिमित परिग्रह व्रत होता

दुखों से बचाता है अणुव्रत का अतिचार रहित पालन- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

दुखों से बचाता है अणुव्रत का अतिचार रहित पालन- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज रोगी दवाइयों का सेवन परहेज के साथ करता है तो रोग

अहिंसा अणुव्रत में प्रसिद्ध यमपाल चांडाल की कहानी

अहिंसा अणुव्रत में प्रसिद्ध यमपाल चांडाल की कहानी हम पहले जिन अहिंसा आदि पांच अणुव्रतों और उनके अतिचारों का क्रमशः वर्णन कर के आए हैं।

ब्रह्मचर्य व्रत में प्रसिद्ध नीली की कहानी

ब्रह्मचर्य व्रत में प्रसिद्ध नीली की कहानी तीसरे अणुव्रत अचौर्याणुव्रत में वारिषेण की कहानी का वर्णन स्थितिकरण अंग में श्रावकाचार की श्रृंखला के तहत 24

पांचवें अणुव्रत में प्रसिद्ध जयकुमार की कहानी

पांचवें अणुव्रत में प्रसिद्ध जयकुमार की कहानी पांचवें अणुव्रत परिग्रहविरति में प्रसिद्ध जयकुमार की कहानी इस प्रकार है। कुरुजांगल देश के हस्तिनागपुर नगर में कुरुवंशी

पाप से नष्ट हो जाती है मनुष्य की सौम्यता -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

पाप से नष्ट हो जाती है मनुष्य की सौम्यता -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पांच अणुव्रत में प्रसिद्ध व्यक्तियों नाम और कहानी पर बात कर

तीसरे चोरी पाप में प्रसिद्ध तापस की कहानी

तीसरे चोरी पाप में प्रसिद्ध तापस की कहानी वत्सदेश की कौशाम्बी नगरी में राजा सिंहस्थ रहता था। उसकी रानी का नाम विजया था। वहाँ एक

चौथे कुशील पाप में प्रसिद्ध यमदण्ड कोतवाल की कहानी

चौथे कुशील पाप में प्रसिद्ध यमदण्ड कोतवाल की कहानी आहीर देश के नासिक्य नगर में राजा कनकरथ रहते थे उनकी रानी का नाम कनकमाला था।