भाग दो : चंदन के वृक्ष वाले आंगन में जन्मे थे सातगौड़ा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

हम आज बात करेंगे सातगौड़ा पाटिल की, जो आगे चलकर आचार्य श्री शांतिसागर महाराज बने। कर्नाटक में पाटिल शब्द ग्राम के मुखिया या सम्पन व्यक्तियों

भाग एक : गृहस्थ रहकर बने भी जो महान वीतरागी संत – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

• मुनि चर्या को पुनर्जीवित करने वाले संत शिरोमणी आचार्य शांति सागर जी महाराज • निर्दोष चर्या को देख कर समाज ने नाम के आगे लगाया चारित्र

भाग चार : अपूर्व था सातगौड़ा का पक्षियों के प्रति प्रेम – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

आप सभी को आशीर्वाद। आज हम बात करेंगे आचार्य श्री शांतिसागर महाराज के जीवन की और उसमें से भी उनके गृहस्थ जीवन की, जब वह

भाग तीन : निस्पृहता से परिपूर्ण था सातगौड़ा का जीवन – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

भाग 2 में हमने आपसे बात की थी सातगौड़ा के परिवार के बारे में और आज हम चर्चा करेंगे उनके व्यक्तित्व की। एक ज्योतिषी ने

भाग छः : जीव मात्र के प्रति दया भाव रखते थे सातगौड़ा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

आज मैं आपको सातगौड़ा की कुछ ऐसी बातों से परिचित करवाऊंगा, जिससे सातगौड़ा की जीवन शैली का अहसास आप सभी को होगा। सातगौड़ा बचपन से

भाग पांच : सातगौड़ा को अपना जीवनदाता मानते थे शूद्र – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

सातगौड़ा के पक्षी प्रेम के बारे में जानकर आपको निश्चित रूप से अच्छा लगा होगा और आज हम बात करेंगे उनकी मानवता के बारे में।

भाग आठ : विदुषी माता से सातगौड़ा में हुआ धर्म और संस्कारों का बीजारोपण – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

बच्चों को संस्कार उनके माता-पिता से मिलते हैं। जैन धर्म में संस्कारों का बीजारोपण करने के लिए 45 दिन के बच्चे को मंदिर ले जाकर

भाग सात : सत्य और मधुर भाषा बोलने में विश्वास करते थे सातगौड़ा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

आप सभी को पता होना चाहिए कि सातगौड़ा को बचपन से इतना वैराग्य क्यों था? क्योंकि सातगौड़ा लौकिक आमोद-प्रमोद के कामों से दूर रहकर सदैव

भाग नव : त्याग और संयम का रहता था सातगौड़ा के घर का वातावरण – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

यह मां के पुण्य का प्रताप था या फिर सातगौड़ा के पुण्यों की महीमा, इसका ज्ञान तो केवल भगवान को ही हो सकता है लेकिन

भाग दस : पिता के प्रति अनुराग के चलते नहीं ली 17-18 वर्ष की उम्र में दीक्षा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

सातगौड़ा जब  9 वर्ष के थे, तभी माता-पिता ने उनकी शादी 6 वर्ष की एक बालिका के साथ कर दी थी। किन्हीं कारणों से बालिका का छ: महीने के