मनचाही वस्तु पर भी अधिकार नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
मनचाही वस्तु पर भी अधिकार नहीं – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण के पर्व 90 में प्रसंग आया है। यह प्रसंग हमें संदेश देता
दुख का कारण कर्म – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
दुख का कारण कर्म – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज पद्मपुराण पर्व 97 में कर्म के कारण राम और सीता क्या सोचते हैं इसका प्रसंग
कर्म सिद्धांत – सीता के वन जाने के बाद राम की व्याकुलता – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
कर्म सिद्धांत – सीता के वन जाने के बाद राम की व्याकुलता – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज कर्म विचित्र हैं। इनकी व्यवस्था भी विचित्र
