मैं कौन? मैं कहां से आया हूं?
मैं कौन? मैं कहां से आया हूं? कब तक अपने आप को पहचान पाऊंगा? मौन साधन का पहला दिन। जिस कमरे में भगवान विराजमान थे,
अकेला महसूस कर रहा हूं, मन स्थिर नहीं है
अकेला महसूस कर रहा हूं, मन स्थिर नहीं है विचार जो हैं वो पुराने हैं, उसी में शुभ अशुभ का द्वंद है अपने आप को
पता ही नहीं चला कि आंखें कब नम हो गईं
पता ही नहीं चला कि आंखें कब नम हो गईं आज मौन के चौथे दिन, मैंने यह महसूस किया किया जो बहुत पहले कर लेना
संन्यास और संसार की चमक साथ नहीं रह सकती
संन्यास और संसार की चमक साथ नहीं रह सकती दूध से तेल निकालने की कोशिश बेकार है, क्योंकि दूध से तो घी ही निकलेगा आज
दूसरा दिन : शरीर का परिवर्तन होता है, यह सोच मृत्यु के भय को कर देगी दूर – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
दूसरा दिन : शरीर का परिवर्तन होता है, यह सोच मृत्यु के भय को कर देगी दूर – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज मौन साधना
पहला दिन : चिंतन से मजबूत होती है आत्मशक्ति- अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
पहला दिन : चिंतन से मजबूत होती है आत्मशक्ति- अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज आज मौन साधना के पहले दिन और पहला चिंतन करते हुए
चौथा दिन : अपने दोषों को स्वीकार करना ही सबसे बड़ा आत्मधर्म – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
चौथा दिन : अपने दोषों को स्वीकार करना ही सबसे बड़ा आत्मधर्म – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज भीलूड़ा में
तीसरा दिन : प्रतिकार से तो बढ़ता है संक्लेश – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
तीसरा दिन : प्रतिकार से तो बढ़ता है संक्लेश – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज मौन साधना के तीसरे दिन उपवास कर अन्तर्मुखी मुनि पूज्य
छठवां दिन : अप्रेक्षा न रखें तो ही बेहतर – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
छठवां दिन : अप्रेक्षा न रखें तो ही बेहतर – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज दुःखों से बचने के लिए अप्रेक्षा नहीं रखनी चाहिए, आज
पांचवा दिन : दोषों से बचने पर ही जीवन सुखद और शांतिमय – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज
पांचवा दिन : दोषों से बचने पर ही जीवन सुखद और शांतिमय – अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज मौन साधना का पांचवा दिन। सोचते-सोचते समय
