स्वाध्याय – 9 : ऐरावत हाथी का वर्णन

स्वाध्याय – 9 : ऐरावत हाथी का वर्णन ऐरावत हाथी एक लाख योजन विस्तार वाला होता है। एक ऐरावत हाथी के 32 मुख होते हैं।

स्वाध्याय – 10 : श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की मूर्ति की ऊंचाई का वर्णन

स्वाध्याय – 10 : श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की मूर्ति की ऊंचाई का वर्णन श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की मूर्ति की ऊंचाई – 58.8 फीट

स्वाध्याय – 11 : धन का खर्च किन क्षेत्रों में करें

स्वाध्याय – 11 : धन का खर्च किन क्षेत्रों में करें 1. भगवान के प्रतिबिंब (प्रतिमा) बनवाने में 2. जैन मंदिर के लिए 3. जिन

स्वाध्याय – 12 : चार अनुयोग

स्वाध्याय – 12 : चार अनुयोग प्रथमानुयोग : पुण्य रूप अर्थ का व्याख्यान करने वाला चरित्र को, पुराण को, बोधि- समाधि के निधान भूत कथा वर्णन

स्वाध्याय – 13 : सात प्रकार के केवली

स्वाध्याय – 13 : सात प्रकार के केवली 1 तीर्थंकर केवली : 2,3 एवं 5 कल्याणक वाले केवली । 2 सामान्य केवली : कल्याणकों से रहित केवली

स्वाध्याय – 14 : ज्ञानाराधना के आठ दोष

स्वाध्याय – 14 : ज्ञानाराधना के आठ दोष 1.स्वाध्याय के समय का ध्यान न रखना पहला दोष है । 2.शुद्ध उच्चारण न करना,अक्षरादिक को छोड़

स्वाध्याय – 15 : सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति के बाह्य कारण

स्वाध्याय – 15 : सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति के बाह्य कारण नरकगति में – जाति स्मरण, धर्मश्रवण ,वेदना अनुभव (तीसरी पृथ्वी तक) और उसके बाद चौथी पृथ्वी

स्वाध्याय-17 : स्वाध्याय के पांच भेद

स्वाध्याय-17 : स्वाध्याय के पांच भेद • आलस्य का त्यागकर ज्ञान की आराधना करना निश्चय स्वाध्याय है। • व्यवहार में स्वाध्याय के पांच भेद हैं

स्वाध्याय – 19 : आहार दान ऐसे करना चाहिए

स्वाध्याय – 19 : आहार दान ऐसे करना चाहिए नवपुण्यैः प्रतिपत्तिः सप्तगुण समाहितेन शुद्धेन । अपसूनारम्भाणा मार्याणामिषयते दानम् ।। 113।। (रत्नकरण श्रावकाचार) पाँचसूनरूप पापकार्यों से

स्वाध्याय – 18 : तीर्थंकर विशेष

स्वाध्याय – 18 : तीर्थंकर विशेष • कलश : तीर्थंकर भगवान के जन्म अभिषेक के कलश का मुख एक योजन (12 किलोमीटर), उदर में चार योजन और