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कृतज्ञता

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नई ऊर्जा से लबरेज हो गया
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सबसे अलग हैं मुनि पूज्य सागर
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बेटे के ससुर जी को दिया नया जीवन
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अपने रास्ते खुद बनाना सीखा
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सरल महात्मा हैं मुनि पूज्य सागर
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सभी संतों के लिए अनुकरणीय
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चली गई नकारात्मकता
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उन्हीं की प्रेरणा से चले धर्म की राह पर
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हिन्दुस्तान के हृदय प्रदेश में ज्ञान और प्रज्ञा की धमनियों से सिंचित एक वीतरागी का मन–मस्तिष्क प्राणीमात्र के उद्धार की लौ जगाए है । स्व और स्वत्व को परमार्थ के लिए स्वाहा कर सर्वकल्याण के निमित्त निकला यह वीतरागी कुछ लक्ष्यों और सपनों के लिए समर्पित भाव से अपनी ही चाल से आगे बढ़ता जा रहा है।

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