गुरु ग्रंथ साहिब जैसे मुनि श्री के प्रवचन

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धर्म की जो बातें गुरु ग्रंथ साहिब में कही गई हैं, वही बातें मुनि श्री अपने प्रवचन में भी कहते हैं। वह सभी धर्मों को साथ लेकर चलने वाले संत हैं। उनसे मिलकर अहसास होता है कि सभी धर्म एक ही बात कहते हैं, वह बात है सर्वधर्म समभाव की। मुनि श्री की वाणी और गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी में काफी समानता है। यही वजह है कि जो कोई भी उनसे मिलता है, चाहे वह जैन हो या अजैन, प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता और उनसे सौहार्द्र रूपी एक कड़ी के रूप में जुड़ जाता है। सौहार्द्र की यह कड़ी एक से एक जुड़कर लंबी होती जा रही है। हम इसलिए उनके कृतज्ञ रहेंगे।

त्रिलोक सिंह

मुख्य ग्रंथी, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, किशनगढ़

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