पाठशाला

तप-संयम अभीष्ट उपलब्धियों का एकमात्र मार्ग – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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पद्मपुराण पर्व 85-86 में त्रिलोकमण्डल हाथी से सम्बंधित बातें आईं हैं। उसे सुनते हैं- जब राम, लक्ष्मण,भरत आदि देशभूषण-कुलभूषण मुनिराज…

धर्म के समागम से प्राणी समस्त इष्ट वस्तुओं को प्राप्त कर सकता है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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आज पाठशाला में बात करेंगे देशभूषण और कुलभूषण मुनिराज के धर्मोपदेश की। इन दोनांे मुनिराज ने अयोध्या में राम के…
jaaniye shalya ke baare me

आज हम पाठशाला में शल्य की बात करेंगे । तो आप शल्य को जानते हैं ।– अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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जो काँटे की तरह अंदर ही चुभता हैं उसे शल्य कहते हैं । मनोविज्ञान की भाषा में मनुष्य की आंतरिक…
chaar hazaar akshohinee thi rawan ki sena

चार हजार अक्षौहिणी थी रावण की सेना – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

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बच्चों, आज पाठशाला में रावण की सेना के बारे में आपको बताएंगे। पद्मपुराण के पर्व 56 में रावण की सेना…
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