प्रेरणा

राम-लक्ष्मण का अतुलनीय भातृ-प्रेम – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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पद्मपुराण पर्व 88 में राम-लक्ष्मण के राज्याभिषेक को लेकर चर्चा की गई है। इस चर्चा से शिक्षा मिलती है कि…

अतुलनीय है राम और भरत की समर्पण भावना – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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परिवार में एक दूसरे के प्रति समर्पण का भाव, त्याग, विनय ही परिजनों को एकसूत्र में पिरोए रखता है। धन आदि तो…

धर्म साधना करने वाले साधुओं के चरणों में हर रोग का उपचार है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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ऐसे सम्पूर्ण रोग, शोक जिनका इलाज विज्ञान के पास भी नहीं है उनका इलाज धर्म साधना करने वाले  मुनि चरणों में…
kitna bhi shatru bhaav ho par maanavta jaruri hai

प्रेरणा : कितना भी शत्रु भाव हो पर मानवता जरूरी है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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पद्मपुराण के पर्व 75 में मानवता की नीति के संबंध में एक प्रेरणादायी प्रसंग आता है। जब लक्ष्मण और रावण…
drand sankalp ke saath aaraadhnaa ki jaaye to phal awashya milta hai

प्रेरणा : दृढ़ संकल्प के साथ आराधना की जाए तो फल अवश्य मिलता है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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रावण अपने संकल्प में इतना दृढ़ था कि उसको कोई विचलित नहीं कर सकता था। पद्मपुराण के पर्व 71 के…
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