आलेख

maanav purushaarth se maanav kalyaan ki yaatra

आदिनाथ से महावीर: मानव पुरूषार्थ से मानव कल्याण की यात्रा – मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज

जैन धर्म की परम्परा में वर्तमान काल में भगवान आदिनाथ प्रथम और भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर हैं। भगवान आदिनाथ ने…
betiyon ke bachne se hi samradh hogi sanskrati

महिला दिवस विशेष: बेटियों के बचने से ही समृद्ध होगी संंस्कृति -अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्य सागर महाराज

भारतीय संस्कृति और जैन संस्कृति में प्रारंभ से ही बेटियों का महत्व रहा है। हम इस युग के प्रथम तीर्थंकर…

समवशरण ही वह स्थान है जहां मनुष्य,तिर्यंच,और देव,एक साथ बैठकर सुनते हैं भगवान का धर्म उपदेश – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

मैत्री भाव जगत में मेरा,सब जीवों से नित्य रहे । दीन-दुखी जीवों पर मेरे,उर से करुणा स्त्रोत बहे । दुर्जन-क्रुर-कुमार्ग…

मौन… एक साधना!

सकारात्कता से परिपूर्ण जीवन ऊर्जा है मौन। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज  मौन… केवल वाणी से कुछ न कहने का…
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