आलेख

मैं सात्विक था… तामसिक नहीं!

नीति से दिग्विजय हुआ, कभी परस्त्री गमन नहीं स्वीकारा लेखक- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज मैं सदा सात्विक विचारों…
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