श्रावक

शत्रुघ्न ने निर्वाह किया श्रावक धर्म का – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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पद्मपुराण पर्व 89 में लिखा है कि युद्ध से पहले शत्रुघ्न ने श्रावक धर्म का निर्वाह करते हुए जिनेन्द्र भगवान…

गृहस्थ दशा में विवेकपूर्वक जीवन – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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श्रावक के जीवन में अनेक तरह की समस्याएं आती हैं। क्यों? उनका घर, परिवार, व्यापार आदि उससे जुड़े होते हैं।…

कैसी भी परिस्थिति हो पर अशुभ वचन नहीं बोलें – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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मनुष्य को अशुभ वचन और बिना प्रयोजन नही बोलना चाहिए। जो मनुष्य इस प्रकार की प्रवृत्ति रखता है वह संकट…
in saath isthitiyon me chhod dena chahiye bhojan

श्रावक : इन सात स्थितियों में छोड़ देना चाहिए भोजन– अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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श्रावक जब भोजन करने बैठता है तो उसे सात स्थितियों में भोजन छोड़ देना चाहिए । इसे अन्तराय कहते हैं।…
aahaar daan se uttam koi daan nahi hai

श्रावक : आहार दान से उत्तम कोई दान नहीं है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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अमितगति कृत श्रावकाचार में आहार दान का महत्व बताते हुए कहा है कि जैसे सूर्य के बिना दिन नही हो…
swayam ko shuddh kar jaap kare

श्रावक : स्वयं को शुद्ध कर जाप करें  – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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कर्म निर्जरा और आत्मशांति के लिए श्रावक जाप करते हैं। जाप करने से पहले हाथ और शरीर के अंगों की…
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