श्रावक

jo shrawak ban dharm dhayaan karataa hai use sab khushiyaa milti hai

श्रावक : जो श्रावक बन धर्म-ध्यान करता है उसे सब खुशियां मिलती हैं – अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी

चारों गति में मनुष्य गति श्रेष्ठ है। मनुष्यभव में जन्म लेकर जो संस्कारों के माध्यम से श्रावक बनकर धर्म ध्यान…

श्रावक : इच्छाओं पर अंकुश रखें, पूण्य का संचय करें – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

मनुष्यों को सदैव अपनी इच्छा के परिमाण समझने चाहिए। इस बात का स्मरण रहे कि इच्छाएं ही दु:ख का कारण…
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