धर्म साधना करने वाले साधुओं के चरणों में हर रोग का उपचार है – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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ऐसे सम्पूर्ण रोगशोक जिनका इलाज विज्ञान के पास भी नहीं है उनका इलाज धर्म साधना करने वाले  मुनि चरणों में सम्भव है।

पद्मपुराण के पर्व अस्सी में ऐसा ही एक प्रसंग आया है। आओ पढ़ते हैं –

सिंहेन्दूर नाम का एक राजा था उस पर शत्रुओ ने आक्रमण कर दिया। वह गुप्त रास्ते से अपनी पत्नी के साथ महल से बाहर निकला और जंगल  की और चला गया। जंगल में महासर्प ने सिंहेन्दूर को डस लिया।  विलाप करती हुई उसकी पत्नी उसे कन्धे पर रखकर उस स्थान पर पहुंच गई जहां पर अनेक ऋद्धियों के धारी मुनि ध्यान योग कर रहे थे।  रानी में मुनि को नमस्कार किया और सिंहेन्दूर राज को मुनि के चरणों मे रख दिया। रानी ने नमस्कार करते हुए मुनि के चरणों का स्पर्श किया और चरणों के स्पर्श किया हुआ हाथ अपने पति को लगाया तो पति सिंहेन्दूर राज महासर्प के डंस की पीड़ा से मुक्त हो गय तथा जीवित हो गया।  उसके बाद सिंहेन्दूर राजा में मुनि को नमस्कार किया।  

यह कथा बताती है कि धर्म और धर्म के रास्ते पर चलने वाले मुनियों की वंदना से व्यक्ति शारीरिकमानसिक और आर्थिक दुःखो से दूर होता हैबस उसमें श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए। तो चलो क्यों नहीं हम इस कथा से प्रेरणा लेकर कोरोना महामारी से बचने के लिए सच्चे और निस्पृही साधुओं की चरण वन्दना करें।  

अनंत सागर
प्रेरणा ( चौपनवां भाग )
13 मई , 2021, गुरुवार
भीलूड़ा (राज.)

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