लक्ष्मण का वैभव – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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पद्मपुराण पर्व 94 में लक्ष्मण के वैभव का वर्णन आया है। आओ जानते हैं क्या था उनका वैभव…

लक्ष्मण सात रत्नों से विभूषित थे। चक्र, छत्र, धनुष, शक्ति,गदा,मणि और खङ्ग।  ये सात रत्न लक्ष्मण के पास थे। लक्ष्मण की सत्तरह हजार स्त्रियां थी। उन स्त्रियों में कीर्त्ति, लक्ष्मी और रति की समानता प्राप्त करने वाली गुणवती, शीलवती, कलावती, सौम्य और सुंदर चेष्टाओं को धारण करने वाली आठ महादेवियों थीं। महादेवियों के नाम राजा द्रोणमेघ की पुत्री विशल्या, रुपवती, वनमाला, कल्याणमाला, रतिमाला, जितपद्मा,भगवती,मनोरमा के नाम पर थे।। लक्ष्मण के अढ़ाई सौ पुत्र थे। उनमें से कुछ नाम इस प्रकार हैं -वृषभ, धरण, चन्द्र, शरभ, मकरध्वज, धारण, हरिनाग, श्रीधर, मदन और अच्युत आदि। इनमें श्रीधर विशल्या का पुत्र था। रुपवती के पुत्र का नाम पृथ्वी तिलक था। कल्याणमाला का पुत्र मङ्गल था। पद्मावती के विमलप्रभ नामक पुत्र था। वनमाला के अर्जुनवृक्ष नामक पुत्र था। राजा अतिवीर्य की पुत्री ने श्रीकेशी नामक पुत्र उत्पन्न किया। भगवती का पुत्र सत्यकीर्ति था। मनोरमा के सुपार्श्वकीर्ति नाम का पुत्र था। यह सभी कुमार महाशक्तिशाली तथा शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण थे। इसके अलावा और भी हैं।

अनंत सागर
पाठशाला
19 जून 2021, शनिवार
भीलूड़ा (राज.)

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