लवण और अंकुश की सर्वगुणसम्पन्नता – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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पद्मपुराण के पर्व 100 में लिखा है- लवण और अंकुश दोनों  सर्वगुणसम्पन्न थे। उन गुणों में कुछ गुण आज आपको बताते हैं…

लवण और अंकुश के वक्षःस्थल श्रीवत्स के चिन्ह से अलंकृत थे। वे दोनों तेज से सूर्य को,कांति से चन्द्रमान को,ओज से इन्द्र को,गाम्भीर्य से समुद्र को, स्थिरता के योग से सुमेरु को, क्षमा से पृथ्वी को, शूरवीरता से जयकुमार को और गति से हनुमान को जीतने वाले थे। वे धर्म की अपेक्षा साधु के समान, सत्त्व अर्थात धैर्य की अपेक्षा अर्ककीर्ति के समान,सम्यग्दर्शन की अपेक्षा पर्वत के समान और दान की अपेक्षा श्रीविजय बलभद्र के समान थे। अभिमान से अयोध्या थे अर्थात उनके साथ कोई युद्ध नहीं कर सकता था। साहस से मधु कैटभ थे और महायुद्ध में इंद्रजित तथा मेघवान थे। वे गुरुओं की सेवा करने में तत्पर रहते थे। जिनेन्द्रदेव की कथा अर्थात गुणगान करने में लीन रहते थे। नाम के सुनने मात्र से शत्रुओं में भय उत्पन्न करने वाले थे। इस प्रकार लवण और अंकुश गुणरूपी रत्नों के उत्तम पर्वत थे। विज्ञान के सागर थे, लक्ष्मी, श्री, द्युति, कीर्ति और कांति के घर थे। मनरूपी गजराज के लिए अंकुश थे, सौराज्य रूपी घर का भार धारण करने के लिए मजबूत खम्भे थे,पृथ्वी के सूर्य थे, मनुष्यों में श्रेष्ठ थे और आश्चर्यपूर्ण कार्यों की खान थे।

अनंत सागर
पाठशाला
3 जुलाई 2021, शनिवार
लोहारिया (राज.)

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