धार्मिकता का मार्ग – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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बच्चों,आज हम पाठशाला में पद्मपुराण के पर्व 92 में आए एक प्रसंग पर चर्चा करेंगे। सप्तर्षि मुनियों के दर्शन करने जब शत्रुघ्न मधुरा आए, उस समय मुनियों में जो मुख्य मुनि थे, उन्होंने शत्रुघ्न से कहा, आने वाला समय धर्म-कर्म से रहित होगा। दुष्ट और पाखंडियों द्वारा जैनधर्म ढक दिया जाएगा। लोगों में कषाय बढ़ जाएंगी, अतिशय नष्ट हो जाएंगे आदि। काल को आया जानकर तुम स्थाई शुभकार्य करो। मुनियों को आहारदान देकर पुण्य को बढ़ाओ। मधुरा नगर के लोग धर्म में लगे रहें, उनके अंदर दया, करुणा रहे इसलिए घर- घर में जिन प्रतिमाएं स्थापित करवाओ। उनकी पूजा, अभिषेक हो और विधिपूर्वक प्रजा का पालन हो। नगर के चारों और सप्तर्षि मुनियों की प्रतिमा विराजमान कराओ। इस तरह से सब प्रकार की शांति होगी। मुख्य मुनि ने आगे कहा कि जिस घर में जिन प्रतिमा नहीं होगी, उसके घर मारी होगी और वह उस घर को ही नष्ट कर देगी। जिस घर में प्रतिमा होगी, उस घर में ऐसा कुछ नहीं होगा। यह सुनकर शत्रुघ्न ने कहा, मुनिवर आपने जैसा कहा, वैसा ही होगा। तो देखा बच्चों, मुनिवर ने कैसे शत्रुघ्न को मारी से बचने का उपदेश दिया।

अनंत सागर
पाठशाला
12 जून 2021, शनिवार
भीलूड़ा (राज.)

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