अंतर्मुखी के दिल की बात : आप सोचें कि आप क्या कर रहे हैं – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

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दुनिया को बदलने के बजाए अपने आप को बदलना सीख लें तो आप अपनी दुनिया में सुख, शांति और समृद्धि से जी सकते हैं। दुनिया में कोई किसी को बदल नही सकता है। हम जितना समय और शक्ति दूसरों को बदलने में लगाते है उतना अपने आप को बदलने में लगा दें तो यह पूरी दुनिया हमारी हो जाएगी। भगवान महावीर, राम आदि महापुरुषों ने अपने आप को बदला तभी तो आज दुनिया उनकी पूजा करती है। उनके आदर्शो को अपना रही है। भगवान महावीर और भगवान राम के जीवन में भी कई कष्ट, दुःख आए पर वह अपने आप को बदलने में लगे रहे। कभी घबराए नहीं। भगवान महावीर के अहिंसा और राम के मर्यादा के उपदेश से मन, वचन, काय निर्मल होते हैं। वर्तमान में निमर्लता की आवश्यकता है। आज समाज, परिवार में कई विवाद दिखाई दे रहे हैं। इन विवादों से बाहर निकलकर अहिंसा और मर्यादा पर जोर देने की आवश्यकता है। वर्तमान में हम जिस तरह अपनी संस्कृति और संस्कारों को छोड़ रहे हैं वह समाज परिवार के विनाश का कारण बन रहा है। तुम ही सोचना कि क्या आज तुम्हारा भोजन, पहनावा, भाषा, आचरण आदि जैन और भारतीय संस्कृति के अनुसार है? जिस परिवार, समाज की संस्कृति सुरक्षित नही वह परिवार, समाज सुरक्षित नही रह सकता है। ऐसे में आप स्वयं सोचें कि आप क्या कर रहे हैं

अनंत सागर
अंतर्मुखी के दिल की बात
चबालीसवां भाग
01 फरवरी 2021, सोमवार, बांसवाड़ा

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