अपनी संस्कृति से दूर होने के चलते हम आज भी अंग्रेजों के गुलाम : अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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^ श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (कांच मंदिर) में मनाया गया
स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन पर्व

^ आचार्य श्री शांति सागर महाराज मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष पर शांति महोत्सव के तहत परिंडे बांटने का अभियान शुरू

^ सुधर्म सेकंडरी स्कूल के बच्चों ने प्रस्तुत किए विभिन्न कार्यक्रम

^ घर में परिंडा बांध कर सेल्फी भेजने वाले होंगे पुरस्कृत

उदयपुर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में सुधर्म सेकंडरी स्कूल के बच्चों और जैन समाज ने अशोक नगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (कांच मंदिर) में स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन पर्व एक साथ मनाया। इस अवसर पर आचार्य श्री शांति सागर महाराज मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष पर आयोजित हो रहे शांति महोत्सव 2019-2020 में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की श्रंखला के तहत पक्षियों के लिए अनाज डालने का संकल्प करवाने के साथ परिंडे बांटने का अभियान शुरू किया गया।

अंग्रेजी पढ़ना बुरा नहीं, उनकी संस्कृति को अपनाना बुरा

इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि आजादी के इतने साल भी हम अंग्रेजों के आचरण, भाषा, रहन-सहन, खान-पान से आजाद नहीं हो पाए हैं। वे आज भी अपने देश में बैठकर हमारे ऊपर राज कर रहे हैं। हमारी चिंतन शक्ति और संस्कृति को वे अपनी संस्कृति में ढाल रहे हैं। स्थित यह हो गई है कि हम आज अपने सांस्कृतिक पर्वों को नहीं जानते और उनके पर्वों को उनसे अधिक मना रहे हैं। यह गुलामी नहीं तो और क्या है। अंग्रेजी पढ़ना बुरा नहीं है लेकिन उनकी संस्कृति को अपनाना बुरा है। मुनि श्री ने कहा कि पश्चिमी संस्कृति ने हमारे देश के चरित्र को खराब कर दिया है। हम बड़ों का आदर करना भूल रहे हैं, लिहाज भूल रहे हैं। भारतीय संस्कृति में लज्जा और शर्म एक समुचित स्थान है। अंग्रेज हमारे देश को गुलाम इसलिए बना पाए क्योंकि उन्होंने पहले हमारी संस्कृति को अपने अनुसार तोड़ा-मरोड़ा था। अगर सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब हमें एक बार फिर से उनकी गुलामी करनी होगी। अगर उनकी गुलामी से बचना है तो सबसे पहले अपने आचरण को ठीक रखना सीखें, लाज-शर्म जैसी चीजों को दकियानूसी मान कर विकास के नाम पर इन्हें मत छोड़ें।

वात्सल्य का प्रतीक है रक्षाबंधन

रक्षाबंधन के पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने कहा कि रक्षाबंधन एक ऐसा पर्व है, जो वात्सल्य का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रेम करना सिखाता है। आज ही के दिन मुनि विष्णु कुमार ने 700 मुनियों का उपसर्ग दूर कर धर्म और धर्मात्माओं की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि यह मात्र भाई-बहन का पर्व नहीं है, यह दुनिया के हर रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व है, एक-दूसरे के प्रति वात्सल्य का भाव जगाने और उसे बनाए रखने का पर्व है ।

आचार्य श्री करते थे पक्षियों से प्रेम

आचार्य श्री शांति सागर महाराज मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष के मौके पर अनाज डालने का संकल्प दिलाने के बारे में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने बताया कि आचार्य श्री ने हमेशा पक्षियों से प्रेम किया। वह अपने खेत में पक्षियों के लिए अनाज खाने के लिए रखते थे और उनके लिए पीने के पानी की भी व्यवस्था करते थे। आज हमें भी संकल्प करना चाहिए कि हम मानव से ही नहीं,बल्कि पशु-पक्षियों से भी प्रेम करेंगे और उनके जीवन यापन में सहयोग देंगे, तभी हमारी प्रकृति सुरक्षित रहेगी और संसार का संतुलन बना रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति सही रहती है तो संसार का हर जीव सुख से अपना जीवन-यापन कर सकता है। इसलिए आज से सभी पक्षियों को अनाज देना प्रारम्भ करें।

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान के साथ हुई। ध्वजारोहण मुनि पूज्य सागर महाराज और सुधर्म सेकंडरी स्कूल के अध्यक्ष रोशन चित्तौड़ा ने किया। रोशन चित्तौड़ा, अजित मानावत, मधु जैन, ने दीप प्रज्जवलन किया। कार्यक्रम में स्कूल के छात्र सोमिल जैन ने देश भक्ति कविता और लवीक्षा जैन ने देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वाले शहीदों के बारे में जानकारी दी। स्कूल के बच्चियों ने सामूहिक नृत्य के माध्यम से सीमा पर लड़ रहे फौजियों की दास्तां प्रस्तुत की तो दूसरे नृत्य में रक्षाबंधन का महत्व बताया। सामूहिक नृत्य में प्रियल जैन ग्रुप और पुनीत ग्रुप ने भाग लिया। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सान्निध्य में णमो लोए सव्वसाहूणं परिवार के आह्वान पर श्री अंतर्मुखी धर्म प्रभावना समिति, अशोक नगर की ओर से आचार्य शांतिसागर महाराज के मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष के अंतर्गत शांति महोत्सव 2019-2020 के तहत बच्चों और समाज के लोगों को परिंडे वितरित किए गए, साथ ही रोज पक्षियों के लिए दाने रखने की व्यवस्था करने का संकल्प दिलाया गया। इस अवसर पर सब से पहले एक बच्चे और समाज के प्रमुख को अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने परिंडा दिया और फिर समाज के अन्य लोगों ने सभी को परिंडे दिए। खास बात यह भी है कि घर में परिंडा बांध कर उसके साथ सेल्फी भेजने वाले को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

रक्षा बंधन के मौके पर बच्चों के लिए राखी सजाओ प्रतियोगिता भी रखी गई, जिसमें प्रथम स्थान रिद्धिमा माली ने, दूसरा स्थान हर्षिता माली ने और तीसरा स्थान रितिका नागदा ने प्राप्त किया। इसी प्रकार समाज स्तर पर भी राखी सजाओ प्रतियोगिता रखी गई, जिसमें प्रथम स्थान सौम्य चित्तौड़ा ने, दूसरा स्थान भावना चित्तौड़ा ने और तीसरा स्थान भारती चित्तौड़ा ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती मंजुला खमेसरा, समाज के अध्यक्ष रोशन चित्तौड़ा, ओम प्रकाश भोरावत, रमेश मेहता, प्रकाश मेहता, संदीप चित्तौड़ा, प्रदीप चित्तौड़ा और सीमा गांधी भी उपस्थित थे। पूरे पांडाल को तीन रंग के गुब्बारों से सजाया गया था। इससे पहले श्री शांतिनाथ मंदिर में सुबह 5 बजे भगवान का पंचामृत अभिषेक, भक्तामर विधान, सहस्त्रनाम जाप, अकम्पनाचार्य और मुनि विष्णु कुमार की पूजा कर भगवान श्रेयांसनाथ को मोक्ष कल्याण का लड्डू चढ़ाया गया। कार्यक्रम में अंत में प्रकाश चित्तौड़ा की और से प्रभावना के रूप में लड्डू वितरण किए गए।

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