भाग चार : अपूर्व था सातगौड़ा का पक्षियों के प्रति प्रेम – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

label_importantशांति कथा

आप सभी को आशीर्वाद। आज हम बात करेंगे आचार्य श्री शांतिसागर महाराज के जीवन की और उसमें से भी उनके गृहस्थ जीवन की, जब वह सातगौड़ा थे। सातगौड़ा प्रकृति प्रेमी थे, वह प्रकृति की दी हुई हर देन को स्वीकार करते थे। सातगौड़ा के जीवन से जुड़े एक पक्षी प्रेम प्रसंग की बात हम करते हैं। भोज ग्राम में सातगौड़ा के खेत के पास एक गणू ज्योति दमाले नाम का मराठा रहता था। उसका खेत सातगौड़ा के खेत के पास ही था। मराठा के खेत में अनाज खाने के लिए हजारों पक्षी आ जाते, वह सभी को उड़ा देता था। पक्षी उड़ कर सातगौड़ा के खेत में चले जाते थे और उनके खेत का अनाज खाते थे। सातगौड़ा ने कभी उन पक्षियों को उड़ाया नहीं, बल्कि इन पक्षियों के लिए किसी बर्तन में पानी भरकर रख देते थे ताकि अनाज खाने के बाद वे पानी भी पी सकें। आप-पास के खेत वाले सातगौड़ा को कहते थे कि सारा अनाज पक्षी खा जाएंगे तो तुम्हारा क्या होगा लेकिन जब खेत का अनाज काटा जाता था, सबसे अधिक अनाज सातगौड़ा के खेत से निकलता था। सब आश्चर्य करते थे, ऐसा कैसे होता है। एक बार इसी मराठा ने एक सांप को खेत में मार डाला तो सातगौड़ा बोले, यह काम कुलीन व्यक्ति का नहीं होता। अब आप सब जान ही गए होंगे कि वह पक्षियों से कितना प्रेम करते थे। अगर आपको भी सातगौड़ा जैसा बनना है और मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष से सीखना है तो आप भी पक्षियों के लिए अनाज और पानी की व्यवस्था करें, जिससे एक भी पक्षी भूख और प्यास से न मरे। तो चलो फिर मिलते हैं अगली कड़ी में एक नई कहानी के साथ।

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