स्वाध्याय : 21 अरिहन्त पूजा विशेष – 1

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महापुराणान्तर्गत (श्रावकाचार भाग 1) में श्रावकधर्म का वर्णन करते हुए अरिहन्त देव की पूजा चार प्रकार की बताई गई है ।
1.नित्यमह (सदार्पण) पूजा
2.चतुर्मुख मह पूजा
3.कल्पद्रुम पूजा
4.अष्टाह्निका पूजा

नित्यमह पूजा : अपने घर से प्रतिदिन जिनालय में गंध,पुष्प,अक्षत आदि के द्वारा पूजा करना । भक्ति के साथ जिन बिम्ब,जिनालय आदि बनवाना । जिनालय की व्यवस्था के लिए भूमि दान करना । शक्ति के अनुसार मुनि को आहार देना यह अब नित्यमह (सदार्पण) पूजा है ।
चतुर्मुख मह पूजा : महामुकुटबद्ध राजाओं के द्वारा की जाने वाली पूजा महापूजा है । इस पूजन को चतुर्मुख पूजा,सर्वतोभ्रद पूजा भी कहते हैं ।
कल्पद्रुम पूजा : चक्रवर्ती के द्वारा की जाने वाली पूजा । इस पूजा में याचना करने वालो से चक्रवर्ती पूछता है तुम लोगो को क्या चाहिए? इस प्रकार पूछकर सब की इच्छा को पूरा करता है । इस पूजा को कल्पवृक्ष पूजा भी कहते हैं ।
अष्टाह्निका पूजा : अष्टाह्निका पर्व में की जानी वाली पूजा को अष्टाह्निका पूजा कहते हैं ।

अन्य पूजा का भी वर्णन है
• इन्द्रों के द्वारा की जाने वाली पूजा इन्द्रध्वज पूजा है ।
• नैवेद्य चढ़ाना,अभिषेक करना,आरती करना आदि भी पूजा है ।
नोट– यह सभी पूजन अष्ट द्रव्य के साथ की जाती है। पूजन साम्रगी,करने वाले व्यक्ति और भावों में अंतर होता है। ध्यान देना की भगवान के गुण गान करते समय चढ़ाने योग्य कोई भी पदार्थ चढ़ाया जाता है तो वह सब पूजा ही है ।

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