पाठशाला : चार हजार अक्षौहिणी थी रावण की सेना – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

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बच्चों, आज पाठशाला में रावण की सेना के बारे में आपको बताएंगे। पद्मपुराण के पर्व 56 में रावण की सेना का वर्णन आया है। रावण की सेना चार हजार अक्षौहिणी थी। अक्षौहिणी का प्रमाण इस प्रकार है।

हाथी, घोड़ा, रथ और प्यादे (पैदल चलने वाले) ये सेना के चार अंग (प्रकार, भेद) होते है। इनकी गिनती के आठ भेद होते हैं। पत्ति, सेना, सेनामुख, गुल्म, वाहिनी, पृतना, चमू, अनीकिनी।

-जिसमे एक रथ, एक हाथी, पांच प्यादे और तीन घोड़े होते हैं उसे पत्ति कहते हैं।
-तीन पत्ति की एक सेना होती है।
-तीन सेना का एक सेनामुख होता है।
-तीन सेनामुख का एक गुल्म होता है।
-तीन गुल्म की एक वाहिनी होती है।
-तीन वाहिनी की एक पृतना होती है।
-तीन पृतना की एक चमू होती है।
-तीन चमू की एक अनीकिनी होती है।
– दस अनीकिनी की एक अक्षौहिणी होती हैं।

इसी तरह एक अक्षौहिणी में

-रथों की संख्या इक्कीस हजार आठ सौ सत्तर होती है।
-हाथियों की संख्या इक्कीस हजार आठ सौ सत्तर होती है। -पदाति एक लाख नौ हजार तीन सौ पचास होते है।
– घोड़ों की संख्या पैसठ हजार छह सौ दस होती है।

इस प्रकार रावण की चार हजार अक्षौहिणी सेना थी।

अनंत सागर
पाठशाला
अड़तालीसवां भाग
27 मार्च 2021, शनिवार, भीलूड़ा (राजस्थान)

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