भाग दो : चंदन के वृक्ष वाले आंगन में जन्मे थे सातगौड़ा – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

label_importantशांति कथा

हम आज बात करेंगे सातगौड़ा पाटिल की, जो आगे चलकर आचार्य श्री शांतिसागर महाराज बने। कर्नाटक में पाटिल शब्द ग्राम के मुखिया या सम्पन व्यक्तियों के आगे लगता था। सातगौड़ा क्षत्रिय वंश चतुर्थ जाति के जैन थे। सातगौड़ा का जन्म उनके मामा के घर येलगुड़ में माता सत्यवती, पिता भीमगौड़ा पाटिल के पुत्र के रूप में आषाढ़ कृष्ण 6, विक्रम संवत 1929 (सन 1872 ) को हुआ था। सातगौड़ा का जन्म स्थल भोज प्रसिद्ध है, क्योंकि भोज से येलगुड़ चार किलोमीटर दूर था, जो भोज ग्राम के अंतर्गत ही आता है। सातगौड़ा के जन्म के पहले माता को एक सपना आया कि उन्हें एक सौ आठ सहस्त्रदल कमलों से भगवान का पूजन करना है। परिवार के लोगों ने यह इच्छा भी पूरी की। सातगौड़ा का जन्म जिस घर में हुआ था, उस घर के आंगन में चंदन का वृक्ष था। सातगौड़ा के दो बड़े भाई आदिगौड़ा, देवगौड़ा, एक छोटा भाई कुंभगौड़ा और एक बहन कृष्णा बाई थी। सातगौड़ा सहित पांच भाई-बहन थे। सातगौड़ा का पारिवारिक व्यापार खेती और कपड़े की दुकान थी। सातगौड़ा ने मां की मृत्यु के 4 साल बाद घर का त्याग कर दिया था।

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