छहढाला चौथी ढाल छंद-8

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छहढाला

चौथी ढाल

सम्यग्ज्ञान का महत्व और विषय चाह रोकने का उपाय

जे पूरब शिव गये, जाहि, अब आगे जै हैं।
सो सब महिमा ज्ञानतनी, मुनिनाथ कहै हैं।।
विषय-चाह दव-दाह, जगत-जन अरनि दझावै।
तासु उपाय न आन, ज्ञान घनघान बुझावै।।8।।

अर्थ – भूत, भविष्यत् और वर्तमान इन तीनों कालों में जो भी जीव मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं, करेंगे और आज भी विदेह क्षेत्र से कर रहे हैं, वह सब सम्यक्ज्ञान का ही प्रभाव है, ऐसा श्री जिनेन्द्रदेव एवं उनके गणधरों की दिव्य देशना में वर्णित है। जिस प्रकार दावानल वन की समस्त वस्तुओं को जलाकर भस्मीभूत कर देता है, उसी प्रकार पंचेन्द्रियसंबंधी विषयों की चाह संसारी जीवों को घेर कर जलाती है, सताती है, दु:ख देती है। फिर जैसे मूसलाधार वर्षा उस दावानल को बुझा सकती है, उसी प्रकार यह सम्यक्ज्ञानरूपी मेघसमूह विषयों की चाह को शान्त कर देता है। अन्य कोई भी उपाय कार्यकारी सिद्ध नहीं हो सकता है।

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