छहढाला पहली ढाल छंद 15

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छहढाला

पहली ढाल

मनुष्यगति में बाल्यावस्था, जवानी व वृद्धावस्था के दु:ख

बालपने में ज्ञान न लह्यो, तरुण समय तरुणी-रत रह्यो।
अर्धमृतक सम बूढ़ापनो, कैसे रूप लखै आपनो।।15।।

अर्थ – बालपन-लड़कपन में इस जीव को ज्ञान न मिला (अज्ञानी रहा)। जवानी में यह स्त्री में तल्लीन रहा और बुढ़ापा तो आधे मरे हुए के समान है ही। ऐसी दशा में यह जीव भला अपना आत्म-स्वरूप कैसे जान सकता है?

विशेषार्थ – मेरी आत्मा चैतन्यमयी, अखण्ड, अमूर्तिक एवं ज्ञान-दर्शन का पिण्ड है। इस प्रकार के स्वभाव की श्रद्धा आज तक नहीं हुई यही ‘‘कैसे रूप लखै आपनो’’ इस पंक्ति का विशेष भाव है।

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