कोरोना कह रहा है स्वयं को बचाओ – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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corona kah raha hai swayam ko bachaao

कोरोना महामारी से समझ लें कर्म सिद्धांत को तो आप वर्तमान में अपने आप को और आने वाले समय में इससे भी भयानक शारीरिक, मानसिक और अर्थ संकट से अपने आप को बचा सकते हैं । भगवान किसी ना किसी रूप में संबोधन करने या बताने आते ही हैं । कोरोना को ही भगवान मान लो। वह समझा रहा है कि स्वयं अपने आप को बचाओ। कोई तुम्हारी सहायता नहीं करने वाला है। तुम समझ लो भगवान ना किसी का अच्छा करता है ना बुरा। मनुष्य अपने कर्मो से ही अच्छे बुरे का फल भोगता है।
धन,बल,वैभव आदि से न पुण्य खरीदा जा सकता और न पाप को दूर किया जा सकता है। यह तो आप स्वयं कोरोना काल में देख ही रहे हैं। रावण ने जो अच्छे कर्म किए उसके फल से उसे बल,तप,वैभव प्राप्त था पर पाप कर्म के उदय से उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि उसने सीता का हरण किया है वह गलत और पाप का कारण है। न जाने कितने अवसर आए जिस समय रावण को उसकी पत्नी मन्दोदरी,भाई विभीषण,कुम्भकर्ण ,मंत्री,विद्वान,बुजुर्गों आदि ने समझाया कि तुमने गलत किया है। यहां तक कि लक्ष्मण ने मृत्यु के अंतिम समय तक समझाया कि तुम अपनी गलती स्वीकार कर लो और राम से क्षमा मांग लो, पर वह नहीं समझा और मरण को प्राप्त हुआ।
कोरोना महामारी भी समझाने आई है कि आने वाला समय ठीक नहीं। दूसरों को सुधारने के बजाए अपने आप को सुधार लो। अपनी चर्या ,व्यवहार,खानपान आदि बदल लो नहीं तो विनाश तय है ,पर हम रावण बने हुए हैं। समझना ही नही चाहते हैं। यह आप स्वयं सोचो गलती चाहे हमारी हो या उनकी स्वयं कि जिनके कारण हमने अपनो को,अपने देश के रत्नों को खोया है, लेकिन गलती तो हुई है। फिर भी हम समझने को तैयार नहीं। रावण की तरह हम यह कहते हैं कि मुझे कुछ नहीं होने वाला है। एक बार सब को होना ही है। मृत्यु आनी होगी तो कौन रोक सकता है। नेता लोग तो घूम रहे हैं तो हम क्यों नहीं जाएं दुकान या घूमने। क्या डरना पंचम काल में तो ये सब होना ही है। ऐसी कई बातें कर मन को संतुष्ट करते हैं और कर्म की सच्चाई को नहीं समझ पा रहे हैं । कहीं रावण जैसा हश्र हमारा नहीं हो। जिस प्रकार से उसे धीरे-धीरे अपना परिवार,धर्म,सम्मान,धन और अंत में अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा, वैसा ही कुछ हमारे साथ ना हो जाए, इसलिए अभी भी संभल जाओ।

अनंत सागर
कर्म सिद्धांत (इक्यावनवां भाग)
20 अप्रैल,मंगलवार 2021
भीलूड़ा (राज.)

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