हम सब के लिए बेहद हानिकारक हैं पटाखे – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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भगवान महावीर के निर्वाण और गौतम गणधर के केलवज्ञान से जुड़ा पर्व दीपावली आ रहा है। सुबह तो महावीर भगवान को मोक्ष हुआ था और उसी दिन शाम को गौतम गणधर को केवलज्ञान प्राप्त हुआ था। इस अनुसार दीपावली पर्व पर आपको क्या करना चाहिए यह जान लीजिए।
पूजन,पाठ,अभिषेक,निर्वाण लड्डू चढ़ाना,सरस्वती पूजन ,गौतम गणधर पूजन आदि इस पर्व केमुख्य अंग हैं। इस पर्व की खुशी का इजहार हम दीपक जलाकर और जरूरतमंदों को दीपक, मिठाई, कपड़े बांट कर करें तथा धर्म प्रभावना करें।
बच्चों आप ही बताओ महापुरुष के नाम से जुड़े उत्सव पर अगर प्रकृति प्रदूषित हो तो क्या महापुरूषों को अच्छा लगेगा ? आज हम जिस तरह से त्यौहार मना रहे हैं उससे जलवायु, पर्यावरण आदि प्रदूषित हो रहा है। पक्षियों की जान जा रही है। पटाखे फोड़ने से कितना नुकसान हो रहा है बताता हूं-
बीबीसी हिंदी से बात करते हुए डॉक्टर अरविंद कुमार ने कहा, ”जब एक बच्चा जन्म लेता है तो उसके फेफड़े गुलाबी होते हैं। लेकिन बीते कुछ वक़्त से मैं काले फेफड़े देख रहा हूं। ये सब प्रदूषण की वजह से होता है। ये हम सबके शरीर को खोखला कर रहा है। एक चेस्ट डॉक्टर होने के नाते मैं ये बातें अच्छे से समझता हूं। प्रदूषण फैलाने में पटाखों का रोल बहुत ज़्यादा है। पहली वजह- आप एक तय वक़्त में बहुत ज़्यादा मात्रा में पटाखे फोड़ते हैं। दूसरी वजह- पटाखे आप अपने एक मीटर के दायरे में फोड़ते हैं, उससे निकलने वाला धुंआ सीधा आपके अंदर जाता है।
डॉक्टर अरविंद समझाते हैं, ”अगर एक ट्रक या बस से धुंआ निकल रहा है तो सबसे ज़्यादा प्रदूषण उस तेल के पाइप के पास से निकल रहा होता है. लेकिन कोई उस पाइप के पास जाकर खड़ा नहीं होता है. ऐसे में पटाखों के मुकाबले इसका कम असर होता है।”
बच्चों पटाखों से दूर रहिए और अपने छोटे भाई बहनों को भी दूर रखिये वरना… अस्थमा का अटैक आ सकता है। निमोनिया के मामले बढ़ सकते हैं। दिमाग के विकास में दिक्कत आ सकती है।।फेफड़े से संबंधित होने वाली बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है।
इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के मुताबिक़, एक फुलझड़ी जलने से होने वाला नुकसान 74 सिगरेट पीने के बराबर होता है। स्नैक को जलाने से 462 सिगरेट पीने जितना असर होता है। वहीं अनार को जलाने से 34 सिगरेट पीने जितना असर पड़ता है।
जागरण डॉट कॉम ने लिखा है कि जब पटाखों से तेज आवाज निकलती है तो जीवों के लिए यह आवाज 1 हजार गुना ज्यादा हो जाती है, जिससे इन जीवों के कान के पर्दे फटने का ज्यादा खतरा रहता है।
पटाखों से निकलने वाली (सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, मोनोडाइआक्साइड) जहरीली गैस पेड़- पौधों को नुकसान पहुंचाती है, जो हमें शुद्ध हवा देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां पर इन गैसों का प्रभाव ज्यादा होता है वहां पर कई बार पेड़-पौधे भी सूख जाते हैं या पीले पड़ जाते हैं। खासकर छोटे पौधों के ऊपर काफी असर होता है। ये पौधे तेजी से विकसित नहीं होते हैं।
तो बच्चों इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पटाखे कितना नुकसान पहुंचाते हैं। अब निर्णय आप को करना है दिवाली कैसे मनाई जाए।।

अनंत सागर
पाठशाला
(अट्ठाईसवां भाग)
7 नवम्बर 2020, शनिवार, लोहारिया
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी)

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