प्रेरणा : दूसरों की वेदना दूर करना ही मानव धर्म है – अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी

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dusaro ki vednaa dur karna hi maanav dharm hai

पद्मपुराण के पर्व 65 में वर्तमान में हम सब के लिए प्रेरणा देने वाला एक प्रसंग आया है जिससे हम सब को प्रेरणा मिलती है कि शत्रुता का भाव नहीं रखकर और छोटे बड़े का भेद ना कर दूसरों की वेदना को समझना और उसे दूर करना ही मानव का कर्तव्य है।

रावण द्वारा जब युद्ध में लक्ष्मण को मुर्छित कर दिया गया था उस समय विशल्या के पास आने और स्पर्श करने से लक्ष्मण की मूर्छा दूर हो गई थी। राम ने लक्ष्मण की मूर्छा दूर होते ही विशल्या के हाथ से स्पर्श किया हुआ सुंगन्धित चंदन उन सब सैनिकों को भी भेजा जो रोग या दर्द से पीड़ित थे। साथ ही रावण के पुत्र इंद्रजीत आदि जिन्हें बंदी बना रखा था राम ने उन्हें भी विशल्या का स्पर्श किया चंदन भेजा जिससे उनकी वेदना, दर्द भी शांत हो जाए।
इतना ही नहीं वहां पर युद्ध के कारण वेदना और शारिरिक कष्ट से पीड़ित थे सभी योद्धाओं, हाथी, घोड़े आदि पर भी विशल्या का स्पर्श किया जल छिड़का गया, जिससे उन सब का रोग, दर्द और कष्ट दूर हो जाए। ऐसा करने के बाद सब को ऐसा लगा रहा था जैसे उन सब को नया जन्म मिला हो, नींद से सोकर उठे हों।

तो आपने देखा कैसा होता है महापुरुषों का मन…. उनके मन में युद्ध अपनी जगह है और दया, मानवता अपनी जगह है।
राम जैसा बनना है तो राम के जीवन में घटित घटनाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए।

अनंत सागर
प्रेरणा
सैतालीसवां भाग
25 मार्च 2021, गुरुवार, भीलूड़ा (राजस्थान)

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