श्रावक:- ‘ऋद्धिधारी मुनियों की आराधना कर कोरोना से स्वयं को बचाएं’- अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज

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शरीर स्वस्थ हो तो धार्मिक, सामाजिक कार्य अधिक उत्साह से हो पाते हैं। आज शरीर में कई तरह के रोग होने लगे हैं। रोगों को दूर करने के लिए दवा और दुआ दोनों काम आते हैं। भारतीय शास्त्रों का अध्ययन करने से पता चलता है कि दवा काम करे या ना करे, लेकिन दुआ अवश्य काम करती है लेकिन दुआ में श्रद्धा, भक्ति और विश्वास होना आवश्यक है तभी दुआ काम करती है। जैन शास्त्रों में 64 ऋद्धियों का वर्णन है और यह ऋद्धियाँ विशेष मुनियों को ही प्राप्त होती हंै। इस 64 ऋद्धियों में औषधि नाम की आठ ऋद्धियाँ भी हैं जिनके प्रभाव से शरीर निरोगी बन जाता है।
} आमर्षौषधि – इसके प्रभाव से ऋषि के हाथ, पैरों के स्पर्शमात्र से जीव निरोगी हो जाते हैं।
} क्ष्वेलौषधि – इस ऋद्धि से मुनियों के लार, कफ, अक्षिमल आदि जीवों के रोगों को नष्ट कर देते हैं।
} जल्लौषधि – मुनि के शरीर का पसीना सर्व रोगों को नष्ट कर देता है।
} मलौषधि – मुनि के दांत, नासिका आदि का मल भी रोगों को नाश कर देता है।
} विप्रुषौषधि – मुनियों के मूत्र, विष्ठा भी जीवों के भयानक रोगों का नाश कर देते हैं।
} सर्वौषधि – दुष्कर तप से युक्त मुनियों का स्पर्श किया हुआ जल, वायु आदि सम्पूर्ण व्याधियों का नाश कर देता है।
} वचननिर्विष (मुखनिर्विष) – तिक्त रस व विष से युक्त विविध प्रकार का अन्न जिनमुनि के वचन से निर्विषता को प्राप्त हो जाता है।
} दृष्टिनिर्विष – रोग और विष से युक्त जीव जिस ऋद्धि के प्रभाव से मुनि के द्वारा देखने मात्र से ही नीरोगता को प्राप्त कर लेते हैं।
यह बात सत्य है कि ऋद्धियों के धारी मुनि वर्तमान में नहीं हैं पर उन ऋद्धियों को प्राप्त करने की योग्यता रखने वाले मुनिराज आज भी विचरण कर रहे हैं। हम उनके चरणों मे बैठकर उनके आशीर्वाद से ऋद्धियों और ऋद्धिधारी मुनि की आराधना करें तो आज पूरा विश्व जिस कोरोना महामारी से लड़ रहा है उस कोरोना महामारी से हम अपने आप को सुरक्षित कर सकते हैं। आज भारत में कोरोना महामारी से हजारों लोग मर रहे हैं, न जाने कितने लोग इस बीमारी से लड़ रहे हैं और न जाने कितने ही घबराए हुए हैं। आज तक इसकी दवा नहीं बन पाई है…तो क्यों नही हम सब मिलकर ऋद्धियों और ऋद्धिधारी मुनि की आराधना कर अपने आप को कोरोना महामारी से बचाएं।

अनंत सागर
श्रावक
(इकतीसवां भाग)
2 दिसम्बर, 2020, बुधवार, बांसवाड़ा

अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज
(शिष्य : आचार्य श्री अनुभव सागर जी)

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